कश्मीर में बंद और हड़ताल के नए कलेंडर जारी करने पर अलगाववादियों में मतभेद है। हुर्रियत के उदारवादी धड़े के नेता मीरवाइज उमर फारूक ने पूरे साल भर के हड़ताल कलेंडर की जगह बड़े प्रदर्शनों और दीर्घकालिक संघर्ष पर जोर दिया है।
अलगाववादियों के कट्टरवादी नेताओं में शुमार सैयद अली शाह गिलानी और यासीन मलिक हर सप्ताह बंद और हड़ताल के कलेंडर पर जोर दे रहे हैं। अलगाववादी नेताओं के बीच इस मुद्दे पर बैठक के बाद नए साल के लिए बंद और हड़ताल का नया कलेंडर जारी हो सकता है।
आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद बंद और हड़ताल के कलेंडर अलगाववादियों के सभी धड़े मिलकर संयुक्त रूप से जारी करते रहे हैं। हड़ताल के कलेंडर को पाकिस्तान का भी समर्थन मिलता रहा है। वर्तमान में अलगाववादियों ने हड़ताल कलेंडर में पांच दिन की रियायत दे रखी है।
कश्मीर में फिर से शुरू हुए प्रदर्शन
कश्मीर में हिंसा
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पिछले कलेंडर में अलगाववादियों ने बंद और हड़ताल के लिए शुक्रवार और शनिवार का दिन तय किया था लेकिन वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजियों को निवास संबंधी पहचान पत्र दिए जाने और सरफेसी एक्ट को कश्मीर में लागू करने के विरोध में अब रियायत वाले दिनों में भी प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।
अलगाववादियों की संयुक्त अपील के बाद सोमवार को जामिया मस्जिद से नौहट्टा चौक तक के मार्च को नई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अलगाववादियों ने कुछ सियासी दलों और सिविल सोसाइटी के लोगों को भी जोड़ा है। अलगाववादियों ने प्रदर्शन के साथ हिंसा और पत्थरबाजी में घायल लोगों की मदद के लिए भी मुहिम चलाई है।
कश्मीरी लोगों को भड़का रहे हैं अलगाववादी
अलगाववादी नेता यासीन मलिक
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पत्थरबाजी के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में पेलेट गन से आंखें खो चुके बच्चों की तस्वीरें बांटकर युवकों को भड़काने की कोशिश शुरू हुई है। अलगाववादी प्रचारित कर रहे हैं कि केंद्र सरकार पीडीपी की मदद से कश्मीर में इजरायल माडल लागू करना चाहती है।
सुरक्षा बलों में नौकरियों के लिए केंद्र की पहल पर वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजियों को पहचान पत्र दिया जा रहा है लेकिन अलगाववादियों ने इसे कश्मीर में मुसलमानों को अल्पसंख्यक बनाने की साजिश के रूप में प्रचारित किया है।