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महबूबा मुफ्ती ने कश्मीर में शांति के लिए केंद्र को दिया तीन सूत्रीय फार्मूला

Thu, 27 Apr 2017 01:37 PM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र,अमर उजाला/जम्मू
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मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती - फोटो : फाइल फोटो
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मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कश्मीर में अमन के लिए केंद्र के सामने सख्ती, संयम और वार्ता का तीन सूत्री फार्मूला पेश किया है। मुख्यमंत्री ने एजेंडा आफ एलायंस लागू नहीं होने की स्थिति में इस्तीफे के धमकी देकर भाजपा को अपनी कश्मीर नीति पर पुनर्विचार के लिए विवश कर दिया है।
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फार्मूले के तहत महबूबा चाहती है कि आतंकियों के साथ सख्ती हो, लेकिन पत्थरबाजों के साथ नरमी बरती जाए। वह अलगाववादियों से हर हाल में वार्ता पर अड़ने के मूड में दिखने लगी हैं। लिहाजा बदली हुई परिस्थिति में अब पार्टी अध्यक्ष अमित शाह मिशन कश्मीर में जरूरी बदलाव पर मैराथन मंथन के बाद नई रणनीति तय कर सकते हैं। 

कश्मीर के बिगड़े हालात के बीच मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के आक्रामक रुख के बाद भाजपा को अब अपना नया एजेंडा तय करना पड़ सकता है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जम्मू कश्मीर के अपने दो दिवसीय दौरे में संघ परिवार, सिविल सोसाइटी और बुद्धिजीवियों के साथ-साथ विचारधारा से सहानुभूति रखने वाले सभी पक्षों से विचार-विमर्श के बाद नई रणनीति तय करेंगे।
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शाह पार्टी पदाधिकारियों, सांसदों और विधायकों की भी नब्ज टटोलेंगे। भाजपा अध्यक्ष 29 और 30 अप्रैल को जम्मू दौरे पर आ रहे हैं। शाह के दौरे के बाद भाजपा के मिशन कश्मीर का बदला हुआ रूप सामने आ सकता है।
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महबूबा ने भाजपा को दिया सख्त संदेश

महबूबा मुफ्ती - फोटो : PTI
पीडीपी सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात में महबूबा ने अलगाववादियों से वार्ता और एजेंडा आफ एलायंस को गंभीरता से लागू करने पर जोर डाला। दिल्ली से लौटकर उन्होंने पार्टी के कोर ग्रुप और बाद में विधायकों के साथ बैठक कर यह जताने की कोशिश की कि वह पद से चिपके नहीं रहना चाहती हैं।

महबूबा के बदले तेवर के बाद पार्टी और विधायक दल ने उन्हें एक बार फिर से भाजपा से संबंधों पर किसी भी तरह का फैसला लेने को अधिकृत कर दिया है। इस घटनाक्रम से महबूबा ने पार्टी पर अपनी पकड़ फिर से कायम कर भाजपा को सख्त संदेश भी दिया है। 
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भाजपा से नाता तोड़ने का दबाव बना रहे थे असंतुष्ट

महबूबा मुफ्ती - फोटो : file photo
दरअसल पीडीपी में बढ़ रहे असंतोष के बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती गठबंधन के मामले में ज्यादा मुखर हुईं हैं। पीडीपी में कुछ मंत्रियों और विधायकों ने महबूबा पर भाजपा से नाता तोड़ने का दबाव बनाया है।

श्रीनगर उपचुनाव में हार, मतदान के क्रम में भारी हिंसा, पत्थरबाजों पर सख्ती, पत्थरबाज को सेना द्वारा जीप पर बांधकर घुमाने और पीडीपी नेताओं पर उपद्रवियों के बढ़ रहे हमलों के बाद पीडीपी का एक धड़ा भाजपा से गठबंधन के खिलाफ खड़ा होने लगा था।

इस गुट में वैसे विधायक भी शामिल हैं, जिन्हें मंत्री पद खोना पड़ा था। पीडीपी सूत्रों के मुताबिक पार्टी के अंदर चल रही इस हलचल के बाद महबूबा ने भाजपा पर तेवर तल्ख किए। 
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