रियासत सरकार के गठन पर असमंजस जस का तस है। केंद्रीय मंत्री नजमा हेपतुल्ला ने राज्य के राजनीतिक हालात तथा महबूबा से हुई बातचीत की रिपोर्ट हाईकमान को सौंप दी है।
सूत्रों की मानें तो पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की इसी सप्ताह भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात हो सकती है। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी उनकी भेंट हो सकती है।
इस मुलाकात के बाद रियासत में नई सरकार के गठन को लेकर चल रहा राजनीतिक अस्थिरता का दौर खत्म हो सकता है। भाजपा अध्यक्ष सत शर्मा का कहना है कि पीडीपी की ओर से कोई प्रस्ताव मिलने पर बात आगे बढ़ सकती है।
सरकार गठन पर असमंजस जस का तस
पीडीपी कोर ग्रुप की बैठक में महबूबा को सरकार बनाने के लिए अधिकृत किया गया था। इस दौरान पीडीपी-भाजपा के एजेंडा आफ एलायंस को पवित्र दस्तावेज बताया गया था। साथ ही इस पर काफी कुछ काम होने की भी बात कही गई थी।
इससे यह कयास लगाए जा रहे थे कि पीडीपी, भाजपा के साथ मिलकर नई सरकार का गठन जल्द ही कर सकती है। लेकिन चार दिन बाद भी इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है। अलबत्ता पीडीपी के नेता भी गेंद महबूबा के पाले में होने की बात कहकर चुप्पी साध ले रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि महबूबा अपने पिता की इच्छाओं को उचित सम्मान देने की मांग केंद्र से रख सकती हैं। इसके साथ ही राज्य को उदार हाथों से वित्तीय मदद देने, एजेंडा आफ एलायंस के बाकी रह गए कामों पर ठोस आश्वासन देने के मुद्दे पर बात कर सकती हैं।
पीडीपी-कांग्रेस की चुप्पी पर चर्चाएं
नई सरकार के गठन पर पीडीपी और कांग्रेस की चुप्पी पर सियासी गलियारे में चर्चाएं चल रही हैं। कहा जा रहा है कि दोनों की खामोशी में सियासी खिचड़ी पक रही है।
सोनिया गांधी के मुफ्ती के चहारुम पर आने से इन चर्चाओं को और बल मिला था। पीडीपी-कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनने के पीछे तर्क दिया जा रहा है कि आवश्यक संख्या बल का इंतजाम कर लिया गया है।
पिछली सरकार में मंत्री रहे एक विधायक को भी पाले में करने के तर्क दिए जा रहे हैं। ऐसी सूरत में तारिगामी को विधानसभा अध्यक्ष तक बनाए जाने की राजनीतिक हलके में चर्चा है। नेशनल कांफ्रेंस और पैंथर्स पार्टी तो विधानसभा भंग करने की मांग कर चुकी है, लेकिन इस राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति में कांग्रेस बिल्कुल खामोश है।