पीडीपी अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का कहना है कि हमें हिंसा का रास्ता नहीं अपनाना है, बल्कि हम जम्हूरियत पर चलकर अपना मुकाम हासिल करेंगे। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज की सरकार युवाओं का रास्ता बंदकर उन्हें पत्थर उठाने और नशीली दवाओं के इस्तेमाल करने की ओर धकेल रही है। ताकि इसके बहाने युवाओं को निशाना बनाया जा सके। वह राजोरी में शनिवार को पार्टी के युवा सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं।
जम्मू-कश्मीर के युवाओं से उनका बुनियादी हक छीना गया
पूर्व मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि केंद्र सरकार के पांच अगस्त 2019 को लिए गए फैसले के बाद चारों ओर अंधेरा छाया हुआ है। पिछले 70 साल में उतने हालात खराब नहीं हुए थे, जितने 370 समाप्त होने के बाद हुए हैं। 5 अगस्त के बाद सबसे अधिक नुकसान युवाओं का हुआ है। जम्मू-कश्मीर में अब यदि एक हजार नौकरियां निकलती हैं तो उसके लिए पूरे देश के लाखों युवा आवेदन करते हैं। इससे पहले 1000 नौकरियां जम्मू-कश्मीर में ही बांटी जाती थी। आज 1000 नौकरियां पूरे देश में बांटी जाती हैं, जिसके चलते जम्मू-कश्मीर के युवाओं से उनका बुनियादी हक छीना गया है।
पहले ये लोग हिंदू और मुस्लिम को लड़ाया करते थे, आज पहाड़ी और गुज्जर को लड़ा रहे हैं
महबूबा ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि मैं गोली या पत्थर उठाने के लिए नहीं कहती, लेकिन युवाओं को अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए। ताकि आने वाली पीढ़ी उन्हें न कोसे। पहले ये लोग हिंदू और मुस्लिम को लड़ाया करते थे, आज पहाड़ी और गुज्जर को लड़ा रहे हैं। हम इनके लिए मुस्लिम या पहाड़ी या गुज्जर नहीं हैं, हम इनके लिए बाबर की औलाद हैं। यह हमको बाबर की औरंगजेब की औलाद कहते हैं। हमें कैंसर कह कर पुकारते हैं। महबूबा ने युवाओं से कहा कि ऐसी ताकतों का मुकाबला करने के लिए युवाओं को एकजुट होकर आवाज बुलंद करनी होगी। ताकि उनकी पहचान बरकरार रह सके।
कश्मीरियों की जमीन पर बनाए जा रहे सुरक्षाबलों के मकान
अनुच्छेद 370 का अपना पुराना राग अलापते हुए महबूबा ने कहा कि इसको लेकर कोई भी फैसला सिर्फ जम्मू-कश्मीर की विधानसभा ही ले सकती है, और कोई नहीं ले सकता है, लेकिन केंद्र सरकार ने 370 हटाकर यहां के लोगों के साथ अन्याय किया है। हमारी जमीनें बाहर के लोगों को कारखाने बनाने के लिए दी जा रही हैं।
युवा खामोश रहे तो कल उनको अपनी जमीन पर पांव रखने के लिए जगह नहीं मिलेगी
कश्मीर में लोगोें की जमीन छीन कर उन पर सिक्योरिटी फोर्स के पक्के मकान बनाए जा रहे हैं। अगर आज युवा खामोश रहे तो कल उनको अपनी जमीन पर पांव रखने के लिए जगह नहीं मिलेगी। सत्ता में बैैठे लोगों की कोशिश है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को बांटा जाए और अपना वोट बैंक मजबूत किया जाए। अभी जम्मू-कश्मीर में 2 या 3 साल तक चुनाव होने की संभावना नहीं है। जब तक भाजपा की ए, बी और सी टीम तैयार होकर बहुमत के जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंचती तब तक चुनाव नहीं होंगे।
जम्मू-कश्मीर की जेलें युवाओं से भर गईं
महबूबा ने घाटी में हुई हत्याओं पर कहा कि कश्मीर में हमारे हिंदू भाई मारे गए, सिख भाई मारे गए, इनको पूरी खबर थी, कि हमला होने वाला है, लेकिन कुछ नहीं किया। जब हमला हुआ तो हमारे लोग मारे गए। उसके बाद 900 कश्मीरी नौजवानों को गिरफ्तार किया। युवाओं से जम्मू-कश्मीर में जेलें भर गईं तो हमें आगरा की जेलोें में शिफ्ट किया जा रहा है। पहले जम्मू-कश्मीर के युवाओं को आतंकवादी कहा जाता था और आज उन्हें व्हाइट कॉलर आतंकवादी कहा जाता है। इसलिए युवाओं को जम्हूरियत में आवाज उठानी है, और इस जुल्म और सितम को खत्म करना है।