भूस्खलन और बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए सेना द्वारा भेजी गई तीन लाख की दवाइयां पिछले दो दिन से गायब हैं। स्वास्थ्य विभाग को सौंपी गई इन दवाइयों में कई डिब्बे कुछ कर्मचारियों द्वारा गायब करने के कारण इस मामले को दो दिन तक दबाए रखा गया।
शनिवार को जब इन दवाइयों की सूची तैयार करने के लिए जिला अधिकारियों की टीम पहुंची तो सारा मामला सामने आया। जिला अधिकारियों ने जब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को धमकी दी कि वह दवाइयां गायब होने की पुलिस में एफआईआर लगाएंगे तो शनिवार शाम को दवाइयां तहसीलदार के कार्यालय में पहुंच गई।
शुक्रवार का उधमपुर भेजी गई थी दवाइयां
तहसीलदार (मजिस्ट्रेट) संजय बडयाल के अनुसार दवाइयां उनके कार्यालय में हैं। औपचारिकता के लिए जिला प्रशासन ही इसकी सूची (इनवेंटरी) तैयार करता है। सूची तैयार करने के बाद इसे प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जाएगा। तकनीकी कारणों से दवाइयां देरी से पहुंची।
इस मामले में सीएमओ से काफी कोशिशों के बाद भी संपर्क नहीं हो सका। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार जिलाधीश यशा मुद्गल की कोशिशों से सेना ने तीन लाख की दवाइयां शुक्रवार को उधमपुर में भेजी। इन दवाइयों को स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिया गया।
बाजार में बेची जानी थी चुराई हुई दवाइयां
दरअसल सेना दवाइयां मार्केट से खरीदती है। इन दवाइयों पर रेट भी लिखा होता है। जबकि अस्पतालों में उपयोग होने वाली दवाइयों पर नाट फार सेल लिखा होता है, जिसकी हेराफेरी होने या दोबारा मार्केट में बेचे जाने की संभावनाएं कम होती है।
सेना द्वारा भेजी गई दवाइयों पर रेट लिखे होने के कारण इसे मार्केट में दोबारा बेचे जाने की संभावनाओं के कारण ही ऐसा मामला हुआ है। दवाइयां वापस पहुंचने के बाद पूरे मामले में जिला प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की है।