टी 20 विश्व कप क्रिकेट के मैच में 24 अक्तूबर को भारत के खिलाफ पाकिस्तान की जीत पर जश्न मनाने वाले सौरा स्थित स्किम्स के छात्र चिह्नित कर लिए गए हैं। मामले की जांच के लिए गठित आंतरिक समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। ज्ञात हो कि करन नगर स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज और स्किम्स के छात्रों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दो मामले दर्ज किए गए हैं।
पाकिस्तान की जीत के बाद घाटी में कई जगहों पर लोगों के जश्न मनाने के वीडियो वायरल हुए थे। कई स्थानों पर पटाखे भी चलाए गए थे। बताया गया कि आरोपी छात्रों ने अपने हॉस्टल में जश्न मनाया था। क्रिकेट मैच में पाकिस्तान की जीत पर जश्न मनाने वाले कश्मीरी विद्यार्थियों पर एफआईआर दर्ज होने के बाद गैर कश्मीरियों को धमकियां मिलने लगी थी।
सोशल मीडिया पर स्किम्स में पढ़ रही जम्मू की छात्रा का फोटो जारी कर उसे पुलिस का मुखबिर बताया गया था। वहीं आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े यनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ने भी धमकी दी थी। वहीं, सांबा के मनोहर गोपाला इलाके में जश्न मनाने वाले गुज्जर समुदाय के छह युवकों को पुलिस ने हिरासत में लिया था।
मुकदमे की कश्मीर केंद्रित दलों ने की थी निंदा
श्रीनगर। मेडिकल छात्रों के खिलाफ यूएपीए के तहत मुकदमा दर्ज किए जाने की कश्मीर केंद्रित दलों ने निंदा की थी। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने यूएपीए के तहत कार्रवाई को केंद्र की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताया। ट्वीट किया कि ऐसी कार्रवाईयों से ये कश्मीरी युवा और दूर हो जाएंगे।
केंद्र को इसके बजाय यह पता लगाने की कोशिश करनी चाहिए थी कि शिक्षित युवा पाकिस्तान के साथ अपनी पहचान क्यों चुनते हैं। पाकिस्तान की जीत का जश्न मनाने के लिए कश्मीरियों के खिलाफ इतना गुस्सा क्यों? पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि मैच में पाकिस्तान की जीत पर जो जश्न मनाए गए, वो पाकिस्तान के समर्थन में नहीं बल्कि भाजपा को चिढ़ाने के लिए थे।
यह लोगाें की आवाज दबाकर अनुच्छेद 370 हटाने का नतीजा है। नेकां प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा कि ये छोटे बच्चे हैं। पुलिस को इनको उनके माता-पिता के साथ बुलाना चाहिए था। यूएपीए लगाने की बजाय उन्हें चेतावनी देनी थी। पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद लोन ने भी इस फैसले की निंदा करते हुए ट्वीट किया कि मैं दृढ़ता से असहमत हूं। दंडात्मक कार्रवाई से मदद नहीं मिलेगी। ऐसे फैसलों ने अतीत में भी मदद नहीं की है।