अलगाववादी नेता मसर्रत आलम के बेसुरे सुर, पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाने और झंडे लहराने की आंच रियासत में पीडीपी-भाजपा गठबंधन तक पहुंचनी शुरू हो गई थी। इस मुद्दे पर रियासत से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चौतरफा घिरी केंद्र सरकार ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए पीडीपी को साफ संकेत दिया था कि इस प्रकार की गतिविधियां कतई बर्दाश्त नहीं होंगी।
मसर्रत की गिरफ्तारी न होने की स्थिति में गठजोड़ को नुकसान पहुंच सकता है। पार्टी अन्य विकल्पों पर विचार कर सकती है। केंद्र के सख्त रवैये के बाद हरकत में आई सरकार को अंतत: शुक्रवार की सुबह मसर्रत आलम को गिरफ्तार करना पड़ा। लगभग डेढ़ माह पुरानी पीडीपी-भाजपा सरकार में तीन-चार मौकों पर भाजपा की जमकर किरकिरी हुई।
सत्ता में आते ही मुफ्ती ने शांतिपूर्ण चुनाव के लिए पाकिस्तान तथा अलगाववादियों को श्रेय दिया। इसके बाद मसर्रत आलम की रिहाई पर भी खूब हो हंगामा हुआ।
केंद्र के दबाव में हुई मसर्रत की गिरफ्तारी
अब दोबारा मसर्रत की मौजूदगी में पाकिस्तानी झंडे लहराने से पार्टी को विरोधियों के हमले झेलने पड़े। प्रधानमंत्री मोदी के विदेश यात्रा पर होने के चलते केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मोर्चा संभालते हुए मुख्यमंत्री मुफ्ती से बात की।
गृह मंत्रालय के सख्त रवैये के बाद ही मसर्रत तथा गिलानी के खिलाफ मुकदमा कायम हुआ और आखिरकार मसर्रत को सलाखों के पीछे भेजना पड़ा। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि केंद्र के दबाव के बाद ही मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने वीरवार को कहा था कि कानून अपना काम करेगा।
अलगाववादियों की रैली में जिस प्रकार की हरकत हुई उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री तथा भाजपा के वरिष्ठ नेता डा. निर्मल सिंह का कहना है कि उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि राष्ट्र विरोधी ताकतों से सख्ती से निबटा जाएगा और सरकार ने अपना काम पूरा किया।
मसर्रत पर देशद्रोह का मुकदमा नहीं
डेढ़ माह में दो बार हुई भाजपा की हुई किरकिरी
गठबंधन सरकार बनने के दो माह के भीतर मसर्रत मामले पर भाजपा की दो बार किरकिरी हुई है। राष्ट्रव्यापी निंदा का सामना करना पड़ा है। पहली बार सात मार्च को जब मसर्रत को जेल से रिहा गया और अब श्रीनगर में पाकिस्तानी झंडे लहराने के बाद। दोनों ही बार विपक्षियों ने पार्टी को घेरते हुए सत्ता के लिए सिद्धांतों को तिलांजलि देकर किसी भी प्रकार का समझौता करने को आतुर बताया।
मसर्रत पर देशद्रोह का मुकदमा नहीं
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह तथा रियासत के उप मुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह लगातार मसर्रत की गतिविधियों को देशद्रोह की हरकत बताते हुए बयान दे रहे हैं, लेकिन अलगाववादी मसर्रत के खिलाफ देशद्रोह में मुकदमा कायम नहीं हुआ है। पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ गैर कानूनी गतिविधियों में संलिप्त होने तथा लोगों को भड़काने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
एक आला अधिकारी ने बताया कि बुधवार की रैली के दौरान गैर कानूनी गतिविधियों को अंजाम देने और लोगों को भड़काने के आरोप में एफआईआर नंबर 92/2015 दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया। उस पर आरपीसी की धारा 120-बी, 147, 341, 336, 427 के अलावा गैरकानूनी गतिविधियों के अधिनियम 13 के अंतर्गत मामला दर्ज है।