जम्मू-कश्मीर की मुफ्ती सरकार को एक बार फिर अपने सहयोगी दल भाजपा के दबाव में आकर मसर्रत पर अगला कदम उठाना पड़ा। मुस्लिम लीग के अध्यक्ष मसर्रत आलम पर वीरवार को पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) लगाते हुए जम्मू की कोट भलवाल जेल भेजा गया। मसर्रत पर पहले से आरपीसी की धारा 121-ए, 124, 120-बी, 147 और अन्य मामूली अपराधों के अंतर्गत मामला दर्ज हुआ था।
उन पर सैयद अली शाह गिलानी की रैली के दौरान पाकिस्तानी झंडा लहराने और पाकिस्तान के हक में नारेबाजी करने का आरोप लगाया गया। सीजेएम अदालत में मसर्रत द्वारा दायर की गई बेल याचिका में 25 अप्रैल को अंतिम फैसला आना था, लेकिन पीएसए लगाने से अब उसकी रिहाई की संभावना कम हो गई है।
मसर्रत के वकील शब्बीर अहमद भट ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि सीजेएम अदालत बडगाम में मसर्रत की रिहाई को लेकर चल रहे मामले में बुधवार को सरकार अपनी ओर से ठोस सबूत पेश करने में विफल रही और उम्मीद यह लगाई जा रही थी कि शनिवार को उन्हें अदालत की ओर से बेल मंज़ूरी दी जाएगी।
अब नहीं होगी मसर्रत की रिहाई
इसी बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने उन पर पीएसए लगाया गया और अब उनकी रिहाई संभव नहीं। शब्बीर ने बताया कि पीएसए एक ऐसा कानून है, जो किसी के भी खिलाफ लगाया जा सकता है। चाहे उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज न हो। उन्होंने यह भी कहा कि पीएसए के अंतर्गत दो साल तक बिना सुनवाई के जेल में बंद रखा जा सकता है।
वहीं मुस्लिम लीग के जनरल सेक्रेटरी अब्दुल अहद पर्रा का कहना है कि मसर्रत आलम को बडगाम जिले के हुमहामा पुलिस थाने में रखा गया था। जब वीरवार सुबह वह उनसे मिलने वहां गए, तो उन्हें वहां नहीं पाकर वह हैरान रह गए। उन्होंने बताया कि वहां मौजूद एक पुलिस अधिकारी ने उन्हें जानकारी दी कि मसर्रत को सुबह ढाई बजे कहीं ले जाया गया।
पर्रा के अनुसार बाद में उन्हें कहीं से यह जानकारी मिली कि मसर्रत पर पीएसए लगाते हुए उन्हें जम्मू की कोट भलवाल जेल भेजा गया है। विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि मसर्रत पर पीएसए लगाने का आदेश दिल्ली से आया था।
इसलिए देर रात लगाया गया पीएसए
उनके अनुसार केंद्र में भाजपा की सरकार द्वारा एक बार फिर राज्य में मुफ्ती सरकार की लगाम कसते हुए उन्हें यह आदेश दिए कि मसर्रत जो देश विरोधी गतिविधियों में बंद है, 25 अप्रैल को रिहा हो सकता है।
उसके हक में 2013 में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले को ध्यान में रखते हुए सात दिनों के भीतर अदालत में पेश होने का मौका देते हुए पीएसए के तहत हिरासत में लिया जाए।
उच्चतम न्यायालय द्वारा पीएसए के तहत मसर्रत की आखिरी गिरफ्तारी के दौरान फैसला सुनते हुए रोक लगाने के बजाए यह फैसला सुनाया था कि अगर कभी भी भविष्य में मसर्रत की गिरफ्तारी होती है, तो गिरफ्तारी से पूर्व दिन का मौका मिलना चाहिए अदालत में पक्ष रखने के लिए।
मिली जानकारी के अनुसार डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट बडगाम ने बुधवार देर रात मसर्रत पर पीएसए लगाने की मंज़ूरी दे दी थी।