रियासत में अशांत क्षेत्र अधिनियम को गैर कानूनी ढंग से लागू रखने का आरोप लगाते हुए विधान परिषद में मंगलवार को नेकां सदस्य डा. बीए शाह वीरी ने हंगामा कर दिया। प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरू होते हुए वीरी ने प्रश्नकाल को स्थगित कर उनके प्रस्ताव पर चर्चा करवाए जाने की मांग की।
चेयरमैन अमृत मल्होत्रा की ओर से प्रश्नकाल के बाद उन्हें बात रखने का मौका दिए जाने के आश्वासन पर वह बैठ गए, लेकिन प्रश्नकाल के बाद उन्होंने फिर हंगामा करना शुरू कर दिया। चेयरमैन वेल के सामने तक वह नारेबाजी करते हुए पहुंच गए। हंगामा शांत न होने पर चेयरमैन के निर्देश पर मार्शलों ने वीरी को सदन से बाहर निकाला।
वीरी ने कहा कि रियासत में सात अक्तूबर 1997 को एक साल के लिए अशांत क्षेत्र अधिनियम लागू किया। इसके बाद इसकी अवधि नहीं बढ़ाई गई, लेकिन गैरकानूनी ढंग से इसे अब भी लागू रखा गया है। उन्होंने कहा कि अब सवाल यह उठता है कि अगर अधिनियम लागू नहीं है तो इस दौरान अफस्पा के दौरान हुई सैन्य कार्रवाई भी गैर कानूनी थी।
वीरी ने इस मामले में सदन में चर्चा करवाने की मांग की। बहरहाल नेकां के अन्य सदस्यों से उनको समर्थन नहीं मिला। चेयरमैन ने कहा कि सदन को तय नियमों के तहत ही चलाया जाता है। ऐसे में उन्हें हंगामा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने मार्शलों को वीरी को सदन से बाहर निकालने के निर्देश जारी किए।