भारी बारिश और बाढ़ ने जिले में ऐसा कहर ढाया कि सबकुछ तहसनहस हो गया। गांवों से लेकर ब्लाक, तहसील और जिला मुख्यालय तक का एक-दूसरे से पूरी तरह संपर्क कट गया है। सड़कें बह गई हैं। बिजली ढांचा तबाह हो गया है।
संचार सेवाएं ठप हैं। कई स्कूलों की इमारतों को नुकसान पहुंचा है। मकान ढह गए हैं। राशन की भयंकर किल्लत है। फसलें बर्बाद हो गई हैं।
बाढ़ पीडि़तों को कुछ सूझ नहीं रहा है। रास्तों पर पस्सियां गिरने का सिलसिला थम नहीं रहा है। राहत कार्यों में बाधा आ रही है।
368 गांवों का संपर्क देश से कटा
जिले में चहुंओर तबाही का मंजर नजर आ रहा है। 368 गांवों पर कुदरत ने जमकर कहर बरपाया है। ये गांव पूरी तरह शेष रियासत से कट गए हैं। पानी ज्यों-ज्यों उतर रहा है, बाढ़ से हुए जख्म और गहरे होते जा रहे हैं।
बर्बादी देख लोगों की आंखें फटी रह जा रही हैं। जान बचाने के लिए लोगों ने महिलाओं, बजुर्गों और बच्चों को लेकर सुरक्षित स्थानों पर पनाह ले रखी है। उन्हें वर्तमान और भविष्य की चिंता सता रही है।
वर्तमान में खाने के लिए कुछ नहीं बचा है। फसलें बह गई हैं, जिससे आगे भी खाने के लाले पड़ना तय है। सरकार की ओर से अब तक मदद के हाथ नहीं बढ़ते देख बाढ़ प्रभावित असमंजस में हैं, आगे क्या होगा, कैसे भरेंगे बच्चों का पेट।
13 मृतकों के घरवालों को डेढ़-डेढ़ लाख
थन्नामंडी में भूस्खलन में मारे गए सभी तेरह लोगों के घरवालों को डेढ़-डेढ़ लाख रुपये की मदद दी गई है। एमएलए शब्बीर अहमद खान ने रविवार को पीडि़तों को तेरह चेक सौंपे।
उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर वहां की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि लोगों को हर संभव मदद दी जाएगी।
21 करोड़ की त्वरित मदद की दरकार
शासन और प्रशासन को यह अंदाजा भी नहीं था कि उतरते मौसम में बारिश ऐसा कहर ढाएगी। डीसी कार्यालय ने जिले में फौरी राहत के लिए सरकार से 21 करोड़ रुपये तुरंत जारी करने की मांग की है। बिजली, पानी, सड़क सहित मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं को 70 करोड़ का नुकसान हुआ है।
जिला कार्यालय के अनुसार 329 सड़कें, छह सरकारी स्कूल, बिजली और पानी के 130 ढांचे बुरी तरह तबाह हो गए हैं। अधिकारियों के अनुसार जनजीवन को शुरुआती तौर पर पटरी पर लाने के लिए मदद की तुरंत दरकार है। बाढ़ से घिरे गांवों के लोगों ने जहां भी संभव हो सका, सुरक्षित जगह पनाह ली है।