लेह के ऑक्सीजन मैनः यहां आने वालों की थमती सांसों को देते हैं जान
- फोटो : अमर उजाला
कुदरत की खूबसूरती की विविधताओं को अपने आंचल में समेटे जम्मू-कश्मीर का लेह देश ही नहीं, दुनिया भर से आने वाले सैलानियों के लिए पहली पसंद है। यहां के एक युवक ने स्थानीय लोगों समेत पर्यटकों की जिंदगी की रफ्तार बदल दी है। यहां तक कि उनकी एक पहल विकल परिस्थितियों में फंसे होने पर लोगों को जान बचाने का एक और मौका दे रही है। वर्तमान में यह शख्स लेह में आक्सीजन मैन के नाम से जाना जाता है और उनका नाम है विक्की नियाज। विकट परिस्थितियों वह कम भार वाले आक्सीजन सिलेंडर लोगों मुहैया कराते हैं।
स्वरोजगार के लिए विक्की ने 2010 में अपना आक्सीजन प्लांट लेह में स्थापित करने का काम शुरू किया। उनके लिए यह आसान नहीं था। कई शोध में उन्हें समझ आ गया कि यहां भारी मशीनरी पाना आसान नहीं है। कुछ कामयाबी मिलने के बाद उन्होंने इंडस्ट्रियल आक्सीजन सिलेंडरों और मेडिकल सिलेंडरों की भराई शुरू की, लेकिन यहां उन्हें कुछ कमी महसूस हुई। वह ऐसे सैलानियों के लिए आक्सीजन प्लांट स्थापित करना चाहते थे, जो लद्दाख जैसे उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्र में आकर आक्सीजन की कमी से बीमार पड़ जाते हैं। दरअसल, लद्दाख समुद्र तल से 4000 से 16000 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां लोहे के भारी भरकम सिलेंडर का वजन सैलानियों की जान को और जोखिम में डालने वाला काम था।
एल्यूमिनियम के हल्के सिलेंडरों ने बनाई आसान राह
लेह के ऑक्सीजन मैनः यहां आने वालों की थमती सांसों को देते हैं जान
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एल्यूमिनियम के हल्के सिलेंडरों ने बनाई आसान राह
अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में एल्यूमिनियम के छोटे और हल्के आक्सीजन सिलेंडरों ने विक्की की राह आसान कर दी। इन सिलेंडरों को आसानी से ले जाया सकता था। इन सिलेंडरों को उन्होंने सैलानियों को बेचने और किराए पर देने का काम शुरू कर दिया। देखते ही देखते इसका फायदा अन्य लोगों को भी मिलने लगा। टैक्सी चालकों, ट्रेवल एजेंटों, होटलों और गेस्ट हाउस संचालकों ने भी इन्हें स्टाक में रखना शुरू कर दिया। इससे उनकी आय का जरिया भी बढ़ने लगा। देखते ही देखते विक्की लेह के सफल उद्योगपतियों में से एक बन गए। वे इन सिलेंडरों को अपने प्लांट में फिर से भरते हैं। फिलहाल, तीन आउटलेट से आक्सीजन सिलेंडर मुहैया कराए जाते हैं। पहले कम क्षमता का आक्सीजन प्लांट स्थापित करने वाले विक्की का मेगा प्रोजेक्ट पूरे लद्दाख को सिलेंडर मुहैया करवाने का है जो आने वाले कुछ ही माह में पूरा हो जाएगा।
लेह के सरकारी अस्पताल में भी मुश्किल से मिलते थे सिलेंडर, श्रीनगर से लेह पहुंचती थी सप्लाई
विक्की ने बताया कि जब उन्होंने इस तरह के प्रोजेक्ट को शुरू करने की तैयारी तब लेह के सरकारी अस्पताल में भी आक्सीजन सिलेंडर आसानी से उपलब्ध नहीं था। सप्लाई श्रीनगर से थी। ऐसे में उन्होंने खुद का प्लांट स्थापित करने का मन बनाया। लेह के धूल भरे माहौल में मशीनों को चलाना बेहद मुश्किल और अधिक लागत भरा है। उन्होंने बताया कि अब तक पांच सौ से अधिक लोगों को जरूरत के समय निशुल्क आक्सीजन सिलेंडर मुहैया करवा चुके हैं। जो कुछ सक्षम नहीं हैं उन्हें 32500 रुपये की जगह 500 रुपये प्रति सिलेंडर मुहैया कराया जाता है।
आक्सीजन की कमी से मौत की दर में 80 फीसदी की कमी
लेह के ऑक्सीजन मैनः यहां आने वालों की थमती सांसों को देते हैं जान
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आक्सीजन की कमी से मौत की दर में 80 फीसदी की कमी
किसी सैलानी के इमरजेंसी में आक्सीजन की जरूरत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, इसलिए उनके वाहन में चौबीस घंटे सिलेंडर बैकअप उपलब्ध रखा जाता है। उनकी मानें तो लेह में आक्सीजन की कमी से होने वाली मृत्यु दर में पिछले कुछ सालों में 80 फीसदी तक की कमी आई है।
और मिला इनोवेटिक बिजनेस अवार्ड 2018
लेह के ऑक्सीजन मैनः यहां आने वालों की थमती सांसों को देते हैं जान
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और मिला इनोवेटिक बिजनेस अवार्ड 2018
लेह के आक्सीजन प्लांट को अब देश दुनिया में भी अनोखी पहचान मिलने लगी है। पिछले दिनों बंगलूरू में आयोजित इंडिया बिजनेस अवार्ड 2018 की शृंखला में लद्दाख आक्सीजन प्लांट को इनोवेटिव बिजनेस अवार्ड हासिल हुआ है। मार्केट रिसर्च कंपनी ब्लांइड विंक ने इस अनोखी नई खोज को भी मान्यता दी है।