दूर-दराज के क्षेत्रों में सरकारी राशन पहुंचाने में बड़े घोटाले हो रहे हैं। सारा खेल माल ढुलाई का है। जिस राशन को दस किलोमीटर तक पहुंचाना है, उसका किराया 15 से 20 किलोमीटर बताकर सरकार को चूना लगाया जा रहा है।
ऐसी कई शिकायतें एंटी करप्शन ब्यूरो के पास पहुंची हैं। इनमें से कई मामलों की जांच कर ली गई है। कई मामलों की जांच हो रही है। उपभोक्ता मामले एवं जन वितरण विभाग के कई सहायक निदेशक स्तर से लेकर टीएसओ तक के अफसर ब्यूरो के राडार पर हैं।
राजोरी, पुंछ, उधमपुर, रियासी, रामबन, किश्तवाड़ जिलों में ऐसे मामलों की शिकायतें पहुंची हैं। इन जिलों में ब्यूरो के पास 50 से अधिक शिकायतें सिर्फ राशन के हेरफेर की ही हैं।
यह शिकायतें पिछले दो से तीन महीनों के दौरान पहुंची हैं। जानकारी के अनुसार इन जिलों में कई इलाके ऐसे हैं, यहां पर राशन पहुंचाना काफी कठिन है। बस इसी कठिनाई में घोटाले का सारा खेल चल रहा है।
जिस जगह राशन पहुंचाने के दस हजार खर्च हो रहे हैं, उसका खर्चा सरकारी खाते में 15 से 20 हजार डाला जा रहा है। माल ढुलाई के पीछे हो रहे घोटाले की कई शिकायतें विभाग के पास हैं।
ब्यूरो से मिली जानकारी के अनुसार राजोरी के एक टीएसओ पर राशन के हेरफेर में केस दर्ज भी किया गया है। इसी साल ब्यूरो ने केस दर्ज किया है। जिसकी जांच जारी है।
मिट्टी के तेल में कमाए करोड़ों
राशन के हेरफेर में किस कदर मोटी कमाई की जाती है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राजोरी और जम्मू में मिट्टी के तेल के इंचार्ज रहे पूर्व अफसर प्रणव गंडोत्रा पर तीन एफआईआर एंटी करप्शन ब्यूरो ने दर्ज की। जिसकी संपत्ति तक जब्त की गई।
प्रणव ने करोड़ों रुपये का घोटाला किया। इसी तरह के कई और टीएसओ ब्यूरो के राडार पर हैं। जिन्होंने दूर दराज के इलाकों में मिट्टी का तेल पहुंचाने में माल ढुलाई में मोटा माल कमाया है। जिसकी जांच की जा रही है। कुछ ही दिनों में इनके नाम सामने आ सकते हैं।