दिल्ली मेट्रो के बहुप्रतीक्षित रिठाला-कुंडली (नाथूपुर) कॉरिडोर के निर्माण में आ रही बड़ी तकनीकी बाधा अब दूर होने की दिशा में है। बवाना स्थित एमसीडी के वेस्ट-टू-एनर्जी (डब्ल्यूटीई) प्लांट के पास से गुजर रही 400 केवी की हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनें प्रस्तावित मेट्रो एलाइनमेंट के बीच आ रही हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने इन बिजली लाइनों को शिफ्ट करने या उनकी ऊंचाई बढ़ाने का फैसला किया है।
पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (पीजीसीआईएल) और दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड (डीटीएल) की 400 केवी डबल सर्किट ट्रांसमिशन लाइनें मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण में बाधा बन रही हैं। इन लाइनों के पुनर्स्थापन के बाद रिठाला-कुंडली मेट्रो परियोजना के निर्माण कार्य को गति मिलने की उम्मीद है। यह कदम परियोजना की सबसे बड़ी तकनीकी अड़चनों में से एक को दूर करेगा, जिससे लंबे समय से प्रतीक्षित इस कॉरिडोर के निर्माण का रास्ता साफ होने की संभावना है। इस कार्य पर 18.97 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसे पूरा होने में करीब 18 महीने लगेंगे। डीएमआरसी ने इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक बिजली नेटवर्क का पुनर्संयोजन नहीं हो जाता, तब तक कॉरिडोर के प्रभावित हिस्से में मेट्रो का निर्माण आगे नहीं बढ़ सकेगा।
परियोजना के तहत केवल ट्रांसमिशन लाइनें हटाई नहीं जाएंगी, बल्कि पूरी नई एलाइनमेंट तैयार की जाएगी। इसके लिए सर्वे, जियोटेक्निकल जांच, टावरों के नए स्थान तय करना, नई फाउंडेशन बनाना, जरूरत पड़ने पर लैटिस टावर या स्टील मोनोपोल स्थापित करना, नई लाइन की स्ट्रिंगिंग, परीक्षण और कमीशनिंग जैसे सभी तकनीकी कार्य किए जाएंगे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद पुराने टावरों और ट्रांसमिशन लाइनों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। रिठाला-कुंडली (नाथूपुर) कॉरिडोर दिल्ली मेट्रो के फेज-4 की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है।
उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा को जोड़ेगी एक मेट्रो लाइन
रिठाला-कुंडली (नाथूपुर) कॉरिडोर तैयार होने के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा एक ही रेड लाइन मेट्रो नेटवर्क से सीधे जुड़ जाएंगे। यह मौजूदा रेड लाइन का विस्तार होगा, जिससे गाजियाबाद के शहीद स्थल से रिठाला, बवाना और नरेला होते हुए हरियाणा के कुंडली-नाथूपुर तक बिना मेट्रो बदले सफर संभव होगा। करीब 26.463 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर से तीनों राज्यों के लाखों यात्रियों को तेज, सुविधाजनक और निर्बाध यात्रा की सुविधा मिलेगी।
नरेला-बवाना के विकास को मिलेगी नई रफ्तार
करीब 6,230 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना दिल्ली मेट्रो के फेज-4 का छठा कॉरिडोर है, जिसे दिसंबर 2024 में केंद्र सरकार की मंजूरी मिली थी। परियोजना के तहत दिल्ली में 23.737 किलोमीटर लंबा ट्रैक और 19 स्टेशन, जबकि हरियाणा में 2.726 किलोमीटर ट्रैक और दो स्टेशन बनाए जाएंगे। इसके पूरा होने से रोहिणी के कई सेक्टरों, बवाना और नरेला की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। साथ ही नरेला में आवासीय, औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।