आखिरकार तेईस दिनों के बाद नन्ही परी को माता-पिता का साया मिल ही गया। कलियुगी माता-पिता द्वारा छोड़ी गई नवजात बच्ची की किस्मत ने बहुत ही अच्छे और प्यार करने वाले माता-पिता और कई सारे नए रिश्तों के साथ जोड़ दिया।
वहीं पुलिस और अस्पताल प्रशासन द्वारा वीरवार को जैसे ही नन्ही परी को माता-पिता को सौंपा गया, तो परिवार अस्पताल में खुशी से झूम उठा।
कोर्ट में लंबी कानूनी प्रक्रिया करने के बाद पुलिस और अस्पताल प्रशासन की ओर से बिलावर के दिनेश और दीपशिखा को बच्ची सौंपी गई।
झाड़ियों में पड़ी मिली थी नवजात बच्ची
पच्चीस जून को रात पौने दस बजे पुलिस को त्रिकुटा नगर की झाड़ियों के पास कपड़े में लिपटी नवजात बच्ची मिली थी।
पुलिस ने बच्ची को एसएमजीएस अस्पताल के निको वार्ड में इलाज के लिए भर्ती करवाया था। वहीं अस्पताल के डाक्टर, नर्स और महिला पुलिसकर्मियों ने नवजात की अच्छे ढंग से परवरिश की।
नन्हीं परी को गोद लेने के लिए कई परिवार ने कोर्ट में अर्जियां लगाई थीं। जज ने माता-पिता के बैकग्राउंड और पारिवारिक स्थितियों की जांच पड़ताल करने के बाद नन्हीं परी को सौंपा।
सूने आंगन में गूंजेगी किलकारी
पुलिस और अस्पताल प्रशासन द्वारा नन्हीं परी को सौंपे जाने के बाद दिनेश और दीपशिखा काफी खुश थे। नन्हीं परी को गोद में लेते ही दीपशिखा की आंखों में खुशी के आंसु देखने को मिले।
दीपशिखा के ससुराल और मायके वालों ने कहा कि नन्ही परी के मिलने से ऐसा लग रहा है मानो भगवान ने उन्हें नया जीवन दे दिया हो।
नन्हीं परी के परिवार वालों ने उसका नाम सांझी और सुगंधी रखा है।
नन्हे शहजादे के लिए इंतजार
नन्हीं परी के जाने के बाद अब नन्हा शहजादा माता-पिता के लिए इंतजार कर रहा है। एसएमजीएस अस्पताल के वार्ड नंबर पंद्रह में भर्ती नन्हा शहजादा की देखभाल कर रहे अस्पताल के स्टाफ और महिला पुलिसकर्मियों ने कहा कि नन्ही परी को मां-बाप मिल गए।
उन्होंने कहा कि वह प्रार्थना कर रहे हैं कि नन्हे शहजादे को भी अच्छे और प्यार करने वाले माता-पिता मिल जाएं।