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Election 2024: इंजीनियर रशीद के लिए प्रचार में उतरे दोनों बेटे, बारामुला सीट पर त्रिकोणीय हुआ मुकाबला

Fri, 17 May 2024 12:38 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर

सार

तिहाड़ जेल में बंद इंजीनियर रशीद के बेटे अबरार और असरार उनके लिए वोट मांग रहे हैं और रोजाना अलग-अलग जगहों पर रैलियां और रोड शो कर रहे हैं।
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इंजिनियर राशिद का बेटा चुनाव प्रचार करते हुए - फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
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उत्तरी कश्मीर की बारामुला लोकसभा सीट पर चुनावी समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं। आवामी इतिहाद पार्टी (एआईपी) के उम्मीदवार इंजीनियर रशीद के दोनों बेटे चुनाव प्रचार में कूद गए हैं। इनकी रैलियों में जुट रही भीड़ वोट में बदलेगी या नहीं ये तो चार जून को ही पता चलेगा। फिलहाल अब यहां मुकाबला त्रिकोणीय होता नजर आ रहा है। बारामुला लोकसभा सीट से नेकां (नेशनल कॉन्फ्रेंस) के उमर अब्दुल्ला और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (पीसी) से सज्जाद लोन पहले ही चुनाव मैदान में अपनी मजबूती दिखा रहे हैं।

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तिहाड़ जेल में बंद इंजीनियर रशीद के बेटे अबरार और असरार उनके लिए वोट मांग रहे हैं और रोजाना अलग-अलग जगहों पर रैलियां और रोड शो कर रहे हैं। हालांकि उनके चुनावी प्रचार में रिवायती सियासी मुद्दे तो नहीं उठाए जा रहे हैं लेकिन फिर भी वह अपने पिता के प्रति लोगों की सहानुभूति जुटाने की कोशिश में लगे हैं। इंजीनियर राशिद के बेटों के चुनाव प्रचार ने पीपुल्स कॉन्फ्रेंस और नेशनल कॉन्फ्रेंस को कुछ चिंता में जरूर डाल दिया है।

अबरार रशीद (24) और असरार रशीद (20) अभी पढ़ रहे हैं। युवा होने के चलते दोनों युवाओं को से जुड़ रहे हैं। अबरार ने बडगाम में प्रचार के दौरान कहा कि समाज में नौजवान ही बदलाव ला सकते हैं और हमारे साथ नौजवानों का जुड़ाव अच्छा संकेत है। हमारे पिता जेल में बंद हैं और आप सबका भी कोई न कोई जेलों में है। हमारे पिता आप सबका दर्द समझ सकते हैं।
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उमर अब्दुल्ला इस क्षेत्र में कई रैलियां कर चुके हैं। उनके भाषण ज्यादातर प्रतिद्वंद्वी सज्जाद लोन के साथ-साथ भाजपा के खिलाफ नजर आते हैं। वहीं पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के सज्जाद गनी लोन भी उमर अब्दुल्ला को बाहरी और टूरिस्ट करार देने पर ही जोर लगा रहे हैं।

अबरार और असरार राशिद संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं लेकिन कई स्वयंसेवक उनकी मदद कर रहे हैं। अबरार ने कहा कि जो कुछ प्रचार के लिए चाहिए लोग हमें मुहैया करवा रहे हैं।

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बंदूक से ज्यादा अब वोट पर भरोसा करने लगे युवा

श्रीनगर लोकसभा क्षेत्र में 1989 के बाद रिकॉर्डतोड़ मतदान देखा गया और पहली बार कई बहिष्कार वाले क्षेत्रों में हुई वोटिंग कहीं न कहीं यहां के लोगों की लोकतंत्र में विश्वास बहाली को दर्शा रही है। श्रीनगर सीट पर रिकॉर्ड मतदान के बाद अब बारामुला सीट पर भी मतदान प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। इस बार युवाओं की भागीदारी भी यह संकेत दे रही है कि कश्मीर में अब बंदूक से ज्यादा वोट पर भरोसा करने लगा है। जिला चुनाव अधिकारी भी श्रीनगर के बाद बारामुला में रिकॉर्ड मतदान की उम्मीद जता रहे हैं।

परिसीमन के बाद बडगाम और बीरवाह क्षेत्र जोड़े

बारामुला निर्वाचन क्षेत्र में 18 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। यह लोकसभा सीट कुपवाड़ा, बारामुला और बांदीपोरा जिलों में फैली है और परिसीमन के बाद इस क्षेत्र में बडगाम जिले के बडगाम और बीरवाह क्षेत्रों को जोड़ा गया है। नियंत्रण रेखा से सटे जिलों की वजह से यहां सुरक्षा व्यवस्था चिंता का कारण रहती है। जम्मू-कश्मीर पुलिस के कश्मीर जोन के आईजी के अनुसार सुरक्षा के सभी प्रबंध सुरक्षा एजेंसियों के तालमेल और ईसीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार मुकम्मल कर लिए गए हैं।
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नेकां का गढ़ रही है बारामुला लोस सीट, 1957 से अब तक दस बार कब्जा

परिसीमन से पहले यह निर्वाचन क्षेत्र नेकां का गढ़ रहा है। पार्टी ने 1957 से अब तक दस बार इस सीट पर कब्जा किया है। कांग्रेस पार्टी ने चार बार और पीडीपी ने एक बार जीत हासिल की है। इस लोकसभा सीट में परिसीमन के बाद कुल मतदाताओं की संख्या 11.5 लाख है जो विभिन्न समुदायों पर आधारित है। यहां गुज्जर बकरवाल, पहाड़ी और शिया समुदाय बहुल कई इलाके हैं। 2019 में हुए पिछले आम चुनाव में नेकां उम्मीदवार मोहम्मद अकबर लोन ने 133,426 वोट हासिल किए थे। पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी राजा एजाज अली को हराया था जिन्हें 1,03,193 वोट मिले थे। निर्दलीय उम्मीदवार शेख अब्दुल रशीद (इंजीनियर) 1,02,168 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। पीडीपी उम्मीदवार अब्दुल कयूम वानी 53,530 वोटों के साथ चौथे नंबर पर रहे थे।
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