बंदूक से ज्यादा अब वोट पर भरोसा करने लगे युवा
श्रीनगर लोकसभा क्षेत्र में 1989 के बाद रिकॉर्डतोड़ मतदान देखा गया और पहली बार कई बहिष्कार वाले क्षेत्रों में हुई वोटिंग कहीं न कहीं यहां के लोगों की लोकतंत्र में विश्वास बहाली को दर्शा रही है। श्रीनगर सीट पर रिकॉर्ड मतदान के बाद अब बारामुला सीट पर भी मतदान प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। इस बार युवाओं की भागीदारी भी यह संकेत दे रही है कि कश्मीर में अब बंदूक से ज्यादा वोट पर भरोसा करने लगा है। जिला चुनाव अधिकारी भी श्रीनगर के बाद बारामुला में रिकॉर्ड मतदान की उम्मीद जता रहे हैं।
परिसीमन के बाद बडगाम और बीरवाह क्षेत्र जोड़े
बारामुला निर्वाचन क्षेत्र में 18 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। यह लोकसभा सीट कुपवाड़ा, बारामुला और बांदीपोरा जिलों में फैली है और परिसीमन के बाद इस क्षेत्र में बडगाम जिले के बडगाम और बीरवाह क्षेत्रों को जोड़ा गया है। नियंत्रण रेखा से सटे जिलों की वजह से यहां सुरक्षा व्यवस्था चिंता का कारण रहती है। जम्मू-कश्मीर पुलिस के कश्मीर जोन के आईजी के अनुसार सुरक्षा के सभी प्रबंध सुरक्षा एजेंसियों के तालमेल और ईसीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार मुकम्मल कर लिए गए हैं।
नेकां का गढ़ रही है बारामुला लोस सीट, 1957 से अब तक दस बार कब्जा
परिसीमन से पहले यह निर्वाचन क्षेत्र नेकां का गढ़ रहा है। पार्टी ने 1957 से अब तक दस बार इस सीट पर कब्जा किया है। कांग्रेस पार्टी ने चार बार और पीडीपी ने एक बार जीत हासिल की है। इस लोकसभा सीट में परिसीमन के बाद कुल मतदाताओं की संख्या 11.5 लाख है जो विभिन्न समुदायों पर आधारित है। यहां गुज्जर बकरवाल, पहाड़ी और शिया समुदाय बहुल कई इलाके हैं। 2019 में हुए पिछले आम चुनाव में नेकां उम्मीदवार मोहम्मद अकबर लोन ने 133,426 वोट हासिल किए थे। पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी राजा एजाज अली को हराया था जिन्हें 1,03,193 वोट मिले थे। निर्दलीय उम्मीदवार शेख अब्दुल रशीद (इंजीनियर) 1,02,168 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। पीडीपी उम्मीदवार अब्दुल कयूम वानी 53,530 वोटों के साथ चौथे नंबर पर रहे थे।