रियासत में सरकार गठन पर गतिरोध के बीच विधानसभा भंग किए जाने पर कानूनविद् बंटे हुए हैं। कुछ की राय है कि विधानसभा के आखिरी सत्र से छह महीने की अवधि के बाद विधानसभा भंग कर दी जानी चाहिए। यह तिथि नौ अप्रैल को पूरी होगी। विधानसभा की आखिरी बैठक 10 अक्टूबर को हुई थी।
पूर्व एडवोकेट जनरल अल्ताफ नायक का का कहना है कि राज्य के संविधान के अनुसार राज्यपाल को लोकप्रिय सरकार न बनने की स्थिति में नौ अप्रैल तक विधानसभा भंग करनी होगी। छह महीने की अवधि विधानसभा के आखिरी सत्र की अवधि से शुरू होती है।
एक अन्य पूर्व एडवोकेट जनरल इशाक कादिरी तथा पूर्व असिस्टेंट सालिसिटर जनरल आफ इंडिया अनिल भान की राय अलग है। उनका कहना है कि राज्यपाल शासन लागू होने की तिथि से छह महीने के बाद ही विधानसभा भंग की जा सकती है।
राज्यपाल शासन आठ जनवरी को लागू हुआ था। उनका कहना है कि आठ जनवरी से ही छह महीने की तिथि को माना जाना चाहिए। यदि विधानसभा भंग होती है तो नए सिरे से चुनाव कराना होगा।