कश्मीर घाटी में कौसर नाग यात्रा को लेकर अभी भी तनाव जारी है। विरोध के चलते घाटी में कल घारा 144 लागू की गई जिसके बाद आज घाटी में तुलनात्मक रूप से कुछ शांति देखी गई।
इस बीच रियासी से यात्रा के लिए निकला दल वासप पहुंचा। पहले ईद और बाद में यात्रा के विरोध के चलते घाटी में कई दिनों से कोई काम नहीं हो पाया है।
शहर के शांत होने के बाद मार्केट में सैकड़ों की तादाद में लोग पहुंचे। इसके अलावा अमरनाथ यात्रा पर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं की मूवमेंट भी सामान्य रही।
आगामी बुधवार को राज्य कैबिनेट की बैठक होने वाली है उम्मीद है उसमें विवाद का कोई हल निकल सकेगा।
रियासी वापस पहुंचा दल
रियासी कसबे से कौसर नाग यात्रा के लिए गए यात्रियों का जत्था वापस लौट आया। इस जत्थे में शामिल लोगों ने नागपंचमी के शुभ अवसर पर वहां पर मौजूद प्राकृतिक झील में स्नान कर पूजा-अर्चना की।
गौरतलब है कि कश्मीर में इस यात्रा का अलगाववादियों और कुछ अन्य लोगों के द्वारा विरोध कर इसको बंद करने को कहा जा रहा है। कहा जा रहा है कि पर्यावरण को इस यात्रा से खतरा पैदा हो सकता है।
मौजूदा समय के दौरान कश्मीर को यात्रा चलने के विरोध में बंद भी रखा गया है, जिसकी चारों तरफ कड़े शब्दों में निंदा की जा रही है।
कई सालों से बंद थी यात्रा
बता दें कि कौसर नाग यात्रा आतंकवाद के कारण पिछले कई वर्षों से बंद रही थी, लेकिन उसके बाद अब दोबारा इस यात्रा की शुरुआत कर दी गई है।
रियासी से भी यह यात्रा इस वर्ष लगातार पांचवें साल निकाली गई, जिसमें शमिल यात्री यात्रा के अध्यक्ष स्वामी रामशरण दास जी महाराज के नेतृत्व में कौसर नाग की यात्रा पर गए थे।
यात्रा को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि कौसर नाग जिला रियासी के तहसील माहौर के दूरदराज क्षेत्र में स्थित है, जहां पर मौजूद झील का एक हिस्सा कश्मीर के साथ लगता है और कश्मीरी समुदाय के लोग भी इस स्थान को काफी पूजनीय समझते हैं।
इसलिए सरकार को चाहिए कि इस यात्रा को रियासी और कश्मीर दोनों तरफ से जारी रखा जाए और जिला मुख्यालय रियासी में इस यात्रा के लिए आधार शिविर बनाया जाए।
ताकि इस यात्रा को और बढ़ाया दिया। लोगों के अनुसार यात्रा चलने से जिले के पहाड़ी एवं पिछडे़ क्षेत्रों में भी विकास की उम्मीदें प्रबल होंगी।
यात्रा बंद करने का विरोध जारी
कौसर नाग यात्रा की अनुमति को रद्द करने के खिलाफ लोक विकास दल के अध्यक्ष विक्रम सिंह सलाथिया ने अलगाववादियों को आडे़ हाथों लेते हुए कहा कि अगर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई तो इसके परिणाम गंभीर होंगे।
कई जगह पर कुछ असामाजिक तत्व सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने में लगे हैं। उससे भी आम जनता को बचकर रहना चाहिए।
सलाथिया के अनुसार कई बार सरकार भी अलगाववादियों के दबाव में आकर काम करने लगती है। ऐसी प्रथा को बंद करना चाहिए। सलाथिया ने कहा कि यात्रा पर रोक लगाना हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाना है।
पाकिस्तान जिंदाबाद और तिरंगा को जलाने वालों की मांगें पूरी की जा रही है। पहले सरकार ने डोगरा प्रमाण पत्र का कानून लागू कर वोट बैंक के एक बड़े हिस्से को नाराज किया, जिसका खमियाजा लोकसभा चुनावों में भी देखने को मिला।