मंदिरों के शहर में आतंकी आसानी से पनाह लेने और अपने नेटवर्क को चलाने में सफल हो रहे हैं। आतंकियों का स्लीपर सेल शहर में मजबूत हो रहा है। हालांकि वह जम्मू में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने में सफल नहीं हुआ है। पिछले दस महीनों में हुई तीन आतंकी वारदातों में दो आतंकी मारे गए और दो जिंदा पकड़े गए।
इन वारदातों की जांच करने के बाद यह बात सामने आई कि तीनों ही मामलों के तार जम्मू से जुड़े और आतंकियों ने जम्मू में रहकर अपना नेटवर्क चलाया। आतंकियों के खातों में पैसे, रहने के लिए जगह, हथियारों की उपलब्धता और शहर की जानकारी आसानी से इनके तक पहुंची है। इसमें होटलों, शहर में स्थानीय यातायात, ढाबों का इस्तेमाल किया गया और खुफिया तंत्र को इसकी भनक तक नहीं लगी।
पांच अगस्त 2015 को उधमपुर के नरसू नाले के पास हुए आतंकी हमले में एक आतंकी मारा गया और एक पकड़ा गया। पकड़े गए आतंकी नावेद से पूछताछ में यह बात सामने आई कि वह दो दिन तक जम्मू क्षेत्र में रुके। कभी बड़ी ब्राह्मणा तो कभी सिद्ड़ा।