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लश्कर के मददगारों का कबूलनामा, पीओके में बैठा हैंडलर कासिम व्हाट्सएप के जरिए सौंपता था काम

Tue, 01 Sep 2020 03:31 PM IST
प्रशांत कुमार विकास बड़ू, रियासी-जम्मू
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मामले की जानकारी देती रियासी पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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रियासी जिले के माहौर में सोमवार को लश्कर-ए-तैयबा के जिस मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ। उसे चलाने वाले ओजीडब्ल्यू(आतंकियों के मददगार) अपने-अपने स्तर पर नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश में लगे थे। पीओके में बैठा मोहम्मद कासिम व्हाट्सएप के जरिए इन ओजीडब्ल्यू को टास्क भेजता था।

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मारे गए या पूर्व आतंकियों के परिवारों को मदद भेजी जाती थी और यह लोग उसकी फोटो खींच लेते थे। यह फोटो बाद में पीओके में कासिम को भेजी जाती थीं। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने ऐसे कई राज उगले हैं, जिसमें कई और नाम सामने आए हैं। मारे गए आतंकियों से लेकर पूर्व आतंकियों और उनके परिवार सदस्य भी पुलिस के रडार पर हैं।
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आरोपियों का कच्चा चिट्ठा
गुलाम हुसैन मिडिल स्कूल कलवा में सरकारी शिक्षक है और पाकिस्तान में रहने वाले कासिम की बहन उसकी भाभी है, जो अभी भी माहौर में ही रहती है। वह कई बार गुलाम हुसैन को कासिम के साथ बात करवाने के लिए कहती थी। दूसरा मददगार अशफाक अहमद मलान बठोई का रहने वाला है और पूर्व आतंकी जमालदीन का बेटा है। जमालदीन सुरक्षाबलों के हाथों मारा गया था।
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अशफाक अहमद क्षेत्र में मजदूरी करता है और इस दौरान वह लोगों को देश विरोधी गतिविधियों के लिए बरगलाने की कोशिश करता रहा। ये भी अपने हैंडलर कासिम के संपर्क में था। तीसरा मददगार अब्दुल अजीज सिलधार का रहने वाला है और मोबाइल फोन की दुकान चलाता है। इस दौरान वह देश विरोधी गतिविधियों के प्रति लोगों को बरगलाने और अन्य काम करता है।

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