डिवीजनल कमिश्नर केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा है कि पूर्व सैनिकों की कालोनी के लिए घाटी में जमीन उपलब्ध नहीं है।
सरकार ने पिछले साल कश्मीर में सैनिक कालोनी का प्रस्ताव रखा था। इस संबंध में केद्र ने मई में राज्य सरकार से जमीन की उपलब्धता पर जानकारी मांगी थी।
उल्लेखनीय है कि सैनिक कालोनी को लेकर राज्य में जमकर सियासत हो रही थी। सभी अलगाववादी संगठनों ने इसके खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया था। नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस भी इसे स्टेट सब्जेक्ट बताया था।
हालांकि राज्य सरकार इस मामले पर पहले भी कई बार यह बयान जारी कर चुकी है कि घाटी में सैनिक कालोनी के लिए कोई जमीन फाइनल नहीं की गई है। पिछले कुछ महीनों से इस मुद्दे पर हो रही राजनीति से राज्य सरकार भी दबाव में चल रही थी।