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हंदवाड़ा के बाद कुपवाड़ा में नार्को-टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़, बरामद हेरोइन की कीमत 65 करोड़ रुपये

Sat, 27 Jun 2020 01:49 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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उत्तरी कश्मीर में एक पखवाड़े के भीतर शनिवार को दूसरी बार सुरक्षाबलों ने नार्को टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। कुपवाड़ा जिले में आतंकियों के दो मददगारों को गिरफ्तार कर इनके पास से 65 करोड़ रुपये मूल्य की हेरोइन बरामद की गई है। इनके पास से दो पिस्टल, चार ग्रेनेड, 10 डेटोनेटर, चार मैगजीन व 55 गोलियां भी मिली हैं। पकड़े गए मददगारों से पूछताछ की जा रही है।

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सीमा पार से मादक पदार्थों तथा हथियारों की खेप भेजी गई थी। इससे पहले 11 जून को हंदवाड़ा में लश्कर-ए-तैयबा के नार्को टेरर मॉड्यूल का पर्दाफाश कर तीन मददगारों को गिरफ्तार किया गया था।

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सूचना के आधार पर सुरक्षाबलों ने कुपवाड़ा से आतंकियों के दो मददगारों को गिरफ्तार किया। इनकी शिनाख्त बारामुला जिले के लच्छीपोरा निवासी मंजूर अहमद लोन व बिजहामा निवासी गुलाम मोहम्मद लोन के रूप में हुई। इनके पास से 65 करोड़ रुपये की साढ़े तेरह किलो हेरोइन बरामद की गई।

पूछताछ में इन्होंने बताया कि वे पीओके में आतंकियों के हैंडलर के संपर्क में थे। साथ ही मादक पदार्थों की तस्करी एवं घाटी में सक्रिय आतंकियों को हथियारों की आपूर्ति में सक्रिय थे। एसएसपी श्रीराम दिनकर ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। इनके पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। एफएसएल जांच के बाद ही स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि बरामद मादक पदार्थ हेरोइन ही है।

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इस मामले की भी जांच कर सकती है एनआईए

उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा नार्को टेरर मॉड्यूल मामले की जांच एनआईए को सौंपी गई है। माना जा रहा है कि कुपवाड़ा जिले के इस दूसरे मामले की जांच भी एनआईए को सौंपी जा सकती है। 11 जून को हंदवाड़ा में पुलिस ने लश्कर के नार्को टेरर मॉड्यूल का पर्दाफाश करते हुए तीन आतंकी समर्थकों को गिरफ्तार किया था। इनसें 21 किलो हेरोइन तथा 1.34 करोड़ रुपये नकद बरामद किया गया था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 100 करोड़ रुपये बताई गई थी। पुलिस ने इस रैकेट की तह तक जाने के लिए एसपी की अगुआई में स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया था।

पाकिस्तान में बैठे आकाओं के संपर्क में थे
पकड़े गए आतंकियों के मददगारों से पूछताछ में सामने आया कि वे पाकिस्तान में बैठे आकाओं के संपर्क में थे। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की आर्थिक मदद के लिए ये लोग ड्रग्स रैकेट चला रहे थे। दोनों स्थानीय युवकों को संगठन में शामिल होने के लिए भी बरगला रहे थे। इनके पकड़े जाने से नशा तस्करों और आतंकियों के गठजोड़ का पर्दाफाश हो गया है।

एलओसी पर खेप मददगार करते हैं प्राप्त
पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठन मादक पदार्थों को नियंत्रण रेखा के रास्ते घाटी में भेजते हैं। इसकी खेप आतंकियों के मददगार ओजीडब्ल्यू प्राप्त करते हैं। इस ड्रग्स को देश के अन्य राज्यों में बेचकर घाटी में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए पैसा इकट्ठा किया जाता है।
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