आजाद भारत के प्रथम परमवीर चक्र विजेता (मरणोपरांत) को श्रद्धांजलि दी गई। जम्मू कश्मीर ब्राह्मण सभा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित लोगों की ओर से मेजर सोमनाथ शर्मा के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। सभा के प्रधान शक्ति दत्त शर्मा ने कहा कि आज जो लोग कश्मीर से सेना वापस बुलाने की मांग कर रहे हैं, उस समय उन्हें कश्मीर में नरसंहार पर उतरे पाकिस्तानी कबायलियों से सेना ने ही बचाया था।
उन्होंने बताया कि पाकिस्तान सेना की ओर से कबायलियों के भेष में 22 अक्तूबर 1947 को कश्मीर पर हमला का कश्मीर का एक बड़ा हिस्सा अपने कब्जे में ले लिया। 26 अक्तूबर को महाराजा हरि सिंह और भारत सरकार के बीच हुए समझौते के बाद 26 अक्तूबर को भारतीय सेना श्रीनगर पहुंची।
मेजर सोमनाथ शर्मा के नेतृत्व में सेना की एक टुकड़ी बड़गाम एयरपोर्ट की रक्षा के लिए पहुंची। देर शाम आसपास छुपे कबायलियों ने मेजर सोमनाथ की टुकड़ी पर हमला किया। इस बीच कई जवान शहीद भी हुए। मेजर सोमनाथ शर्मा ने बहादुरी का परिचय देते हुए दुश्मनों को एयरपोर्ट में घुसने नहीं दिया।
इस बीच एक मोर्टार के हमले में गंभीर रूप से घायल होने पर उन्होंने वीरगति प्राप्त की। उन्हें 26 जनवरी, 1950 को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। इस मौके पर बाबा कैलख देव मंदिर के महंत रोहित शास्त्री ने सरकार से जम्मू एयरपोर्ट का नाम मेजर सोमनाथ के नाम पर रखने की मांग की। श्रद्धांजलि देने वालों में सुनील राका, सुरेश शर्मा, कमल शर्मा, दीपक शर्मा, अजय सूदन आदि उपस्थित थे।