जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के हीरानगर सब डिवीजन के रसाना गांव में आठ वर्षीय बच्ची के साथ दरिंदगी का खेल 10 जनवरी 2018 को शुरू हुआ जब खानाबदोश समुदाय की यह बच्ची मवेशी चराने गई थी और लापता हो गई। बच्ची के परिवार वालों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। एक सप्ताह बाद 17 जनवरी को उसका क्षत विक्षत शव रसाना गांव के नजदीक एक रिहायशी इलाके में मिला।
चार्जशीट के अनुसार, बच्ची के साथ गांव के एक देवस्थान पर चार दिन तक दुष्कर्म किया गया। उसे लगातार बेहोशी के इंजेक्शन देने के बाद दुष्कर्म किया जाता रहा। बच्ची का क्षत विक्षत शव मिलने के बाद बच्ची के परिजनों ने लगभग दो घंटे तक हाईवे जाम कर हीरानगर पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम का गठन किया।
इसके बाद ग्रामीणों के आरोपों के आधार पर एसपीओ दीपक खजूरिया को लाइन हाजिर कर दिया गया। 19 जनवरी को कठुआ पुलिस ने इस मामले में एक नाबालिग को गिरफ्तार करने का दावा किया। पुलिस के अनुसार जांच से पता चलता है कि आरोपी ने बच्ची का अपहरण कर उसे रसाना गांव में मवेशी शेड में रखा। दुष्कर्म का प्रयास किया और विरोध करने पर गला घोंटकर कर मार दिया। फिर पत्थर चेहरे को कुचल दिया, ताकि पहचान न हो सके। अगले ही दिन विधानसभा में इस पर जमकर हंगामा हुआ तो सरकार ने हीरानगर के तत्कालीन थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया।
24 जनवरी को मामला क्राइम ब्रांच को सौंपा गया था
मामला बढ़ता देख सरकार ने 24 जनवरी को मामला क्राइम ब्रांच को सौंप दिया। साथ ही मामले की नए सिरे से जांच की घोषणा की। क्राइम ब्रांच को मामला सौंपे जाने के बाद दूसरे पक्ष ने गोलबंद होकर इसकी सीबीआई जांच की मांग की। उनका कहना था कि कुछ बाहरी नेताओं ने मामले को सियासी रंग देकर क्षेत्र में अशांति का माहौल बनाने की कोशिश की है। स्थानीय लोगों ने हिंदू एकता मंच का गठन कर सीबीआई जांच की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया। इस बीच एक मार्च को हीरानगर सबडिवीजन में बढ़ रहे तनाव और रसाना के लोगों द्वारा पलायन करने की जानकारी मिलने के बाद भाजपा की ओर से कैबिनेट के दो मंत्री चंद्रप्रकाश गंगा व चौधरी लाल सिंह और राज्य भाजपा के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों को कूटा भेजा गया। मंत्रियों ने लोगों को आश्वस्त किया कि सीबीआई जांच की मांग को सरकार तक पहुंचाया जाएगा। बाद में मामले के तूल पकड़ने पर दोनों मंत्रियों को हटा दिया गया।
आठ मई को पठानकोट स्थानांतरित कर दिया गया मामला
9 अप्रैल को क्राइम ब्रांच ने आरोपी सांझी राम, एसपीओ दीपक खजूरिया, सुरेंद्र वर्मा, हेड कांस्टेबल तिलक राज प्रवेश कुमार, सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता और विशाल जंगोत्रा के खिलाफ चार्जशीट दायर की। इस दौरान एक अन्य नाबालिग आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दायर नहीं की गई थी। क्राइम ब्रांच ने 302, 376, 201 और 102 बी के तहत चार्जशीट दायर की जिसके बाद सातों आरोपियों को जिला कारागार कठुआ में शिफ्ट कर दिया गया। आठ मई को मामला कठुआ कोर्ट से पठानकोट कोर्ट शिफ्ट कर दिया गया।