करीब चार वर्ष से कश्मीरी पंडित जगती टाउन के चुनाव का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है, जबकि इसके लिए रिलीफ डिपार्टमेंट की तरफ से चुनाव करवाने का भी एलान किया गया था। इसके लिए बाकायदा अधिसूचना भी निकाली गई, लेकिन आज तक चुनाव नहीं हो सके।
कश्मीरी पंडितों का कहना है कि चुनाव न होने का नुकसान आज तक कश्मीरी पंडित भुगत रहे हैं। अगर जगती में चुनाव करवाकर कोई प्रधान चुना होता तो कश्मीरी पंडितों को आज परेशानियों से नहीं जूझना पड़ता। 2011 में सरकारी की तरफ से जगती में टाउन बनाकर कश्मीरी पंडितों को सौंपी गई थी। टाउन मिलने पर कश्मीरी पंडितों ने रिलीफ डिपार्टमेंट से टाउन के विकास के लिए चुनाव करवाने की मांग की।
रिलीफ कमिश्नर ने चुनाव करवाने के लिए अनुमति दी और इसके लिए एक अधिसूचना भी निकाली। इसमें जगती में तीन जोन बनाए गए। इसके लिए उम्मीदवारों को आवेदन भरने को भी कहा, लेकिन कुछ दिन के बाद इसको ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। सुनील पंडिता ने बताया कि जिस प्रकार हालात बन चुके हैं, जगती टाउन में चुनाव की सख्त जरूरत है।
कश्मीरी नेताओं और अलगाववादियों पर बरसे
कश्मीरी पंडितों के समर्थन में रविवार को आल इंडिया एंटी टेररिस्ट फ्रंट जेएंडके स्टेट की तरफ से जोरदार प्रदर्शन किया गया। फ्रंट के सदस्यों का कहना था कि कश्मीरी नेता कश्मीरी पंडितों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इसको किसी कीमत पर भी सहन नहीं किया जाएगा। प्रधान भारत भंडारी के नेतृत्व में फ्रंट के सदस्यों ने जमकर कश्मीरी नेताओं और अलगाववादियों के खिलाफ प्रदर्शन किया।
भारत भंडारी ने कहा कि 25 वर्ष से हजारों कश्मीरी पंडित परिवार विस्थापन का दर्द झेल रहे हैं। इनको राहत पहुंचाने के बजाय कश्मीरी नेता विरोध करके दर्द पहुंचाने का काम कर रहे हैं। कश्मीर पर कश्मीरी पंडितों का भी हक बराबर है। इनका पुनर्वास बहुत जरूरी है। अलगाववादी विरोध करके लोगों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।