कश्मीरी पंडित कर्मियों ने पीएम मोदी को भेजे पत्र में कहा है कि प्रदेश सरकार ने 5 महीने से वेतन रोक रखा है, ताकि हम पर लौटने और मारे जाने का दबाव बनाया जा सके। हमें भी उसी तरह सुनने की जरूरत है जैसा आपने किसानों को सुना और कृषि कानूनों को वापस लिया।
कश्मीर घाटी में काम करने वाले कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है कि जिस तरह किसानों की सुनवाई हुई, हमारी भी हो। कर्मचारियों ने लिखा, हम वही कश्मीरी पंडित हैं, जिन्होंने आपके सभी फैसलों का तहे दिल से स्वागत किया।
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अनुच्छेद 370 हटाने को उत्सव के रूप में मनाया। आप अपने हर भाषण में हमारा जिक्र करते हैं लेकिन हमें लगता है कि आपको अपने कनिष्ठों से जमीनी रिपोर्ट नहीं मिल रही है क्योंकि वे आपको यह नहीं बता रहे हैं कि हम वैसे ही मारे जा रहे हैं जैसे हम 1990 के दशक में मारे गए थे।
हमें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं, हमारे घर लूटे जा रहे हैं, हमारे मंदिर फिर से जलाए जा रहे हैं और यह सब हमारी केंद्र शासित प्रदेश सरकार की नाक के नीचे हो रहा है। कर्मचारियों ने कहा कि प्रदेश सरकार घाटी में मुट्ठी भर हिंदुओं को सुरक्षा प्रदान करने में विफल रही।
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जब हमने खुद को बचाने के लिए भागना चाहा तब हमें हमारे घरों में कैदी की तरह बंद रखने की कोशिश की। हम 6 महीने से बिना राजमार्गों को बंद किए और राष्ट्र विरोधी नारे लगाए शांतिपूर्ण ढंग से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। हमें अपने विरोध के लिए विदेशों से किसी भी प्रकार की फंडिंग भी नहीं मिल रही है।
जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश सरकार ने 5 महीने से हमारे वेतन को भी रोक रखा है, ताकि हम पर लौटने और मारे जाने का दबाव बनाया जा सके। हमें भी उसी तरह सुनने की जरूरत है जैसा आपने किसानों को सुना और कृषि कानूनों को वापस लिया।
उन्होंने कहा, हमारी मांग उनकी मांगों के बराबर एक प्रतिशत भी नहीं है, हम केवल जम्मू में अस्थायी तबादले की मांग कर रहे हैं जब तक कि घाटी में स्थिति सामान्य नहीं हो जाती। कृपया हमें बचाएं क्योंकि हम कुछ ही लोग बचे हैं जिन्हें लोग कश्मीरी पंडित कहते हैं। अगर बाघों और चीतों को अवैध शिकार से बचाया जा सकता है तो हमें भी जिहादियों से बचाया जा सकता है।