सरहद पार से आतंकवाद को जीवित करने के हर प्रयास को विफल किया जा रहा है। प्रदेश पुलिस सहित सुरक्ष बल और एजेंसियां सतर्क हैं। नापाक पड़ोसी की हर हरकत पर नजर रखी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान हमने खुद को सर्वोत्तम रूप से परखा है और बाधाओं को दूर किया है। इसके परिणामस्वरूप बदली हुई स्थिति है और सुरक्षाबलों के साथ पुलिस भी मैदान में डटी है।
डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि सभी क्षेत्रों पर नियंत्रण है। हमने यह सुनिश्चित किया है कि पत्थरबाजों और भड़काने वालों पर कानून का शासन लागू हो, चाहे वे कोई भी हों। यह बातें उन्होंने रियासी और उधमपुर में वीरवार को सब्सिडरी ट्रेनिंग सेंटर (एसटीसी) तलवाड़ा में एक कांफ्रेंस हॉल के उद्घाटन के अवसर पर प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने बताया कि पुलिस में जल्द ही जवानों की नियुक्ति होगी, जिसके लिए युवा तैयार रहें।
डीजीपी दिलबाग सिंह ने दरबार लगाकर पुलिस जवानों की समस्याएं सुनीं और जल्द ही उन्हें दूर करने का आश्वासन दिया। वहीं, प्रेसवार्ता में कहा कि भर्ती प्रक्रिया कभी भी शुरू हो सकती है। जम्मू-कश्मीर पुलिस देश की सबसे बेहतरीन पुलिस में से एक है।
साइबर और महिलाओं के खिलाफ अपराध के अध्ययन के लिए प्रयास करें महिला अधिकारी
डीजीपी दिलबाग सिंह ने शेर-ए-कश्मीर पुलिस अकादमी उधमपुर में 65 डीएसपी प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण अवधि को सभी कर्मी जीवन भर याद रखते हैं। उन्होंने कहा कि अपने काम पर ध्यान केंद्रित करें और उन लोगों के बारे में चिंता न करें जो आपको नीचे गिराने की कोशिश करेंगे। आपको बस जुनून, समर्पण और पेशेवर तरीके से काम करना है और जवानों के साथ तालमेल, सौहार्द रखना होगा।
उन्होंने एनडीपीएस और यूएपीए मामलों की सजा दर में सुधार के लिए बुनियादी जांच कौशल सीखने की सलाह दी। उन्होंने महिला अधिकारियों से साइबर अपराध, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के अध्ययन के लिए प्रयास करने पर जोर दिया।
सुरक्षा बलों का जानी नुकसान कम करने के लिए करना होगा काम
कोकरनाग मुठभेड़ का जिक्र करते हुए डीजीपी ने कहा कि हमें इस पर काम करना होगा कि कैसे बेहतर प्रतिक्रिया दी जाए ताकि सुरक्षा बलों की जान का नुकसान होने से बचाया जा सके।
उन्होंने कहा, प्रशिक्षण प्रदान करते समय नारको-आतंकवाद, घुसपैठ, ड्रोन ड्रॉपिंग आदि पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। प्रशिक्षुओं को आधुनिक उपकरणों से अवगत कराया जाना चाहिए। जम्मू-कश्मीर पुलिस के प्रयासों और शहीद नायकों के बलिदान से लोग सामान्य जीवन का आनंद ले रहे हैं। बंद के आह्वान की संस्कृति खत्म हो गई है। लोग शांति चाहते हैं और वे पाकिस्तान की आपराधिक मूर्खता को समझ गए हैं।
सक्रिय आतंकवादियों की संख्या घटी, जो बचे उनको किया जाएगा खत्म
डीजीपी ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद का मुख्य स्रोत है। आतंकवाद खत्म करने के लिए सफल अभियान चलाए गए और जारी रहेंगे। सक्रिय उग्रवादियों की संख्या में कमी आयई है, जो बचे हैं उन्हें खत्म करने का प्रयास जारी है। सीमाओं पर और भीतरी इलाकों में सुरक्षा ग्रिड पाकिस्तान समर्थित राष्ट्र विरोधी तत्वों के नापाक मंसूबों को विफल करने के लिए सतर्क और सक्रिय है।