सीबीआई की मुख्य वकील मोनिका कोहली ने बताया कि कुछ आरोपितों के अदालत में मौजूद नहीं होने के कारण पहचान टाल दी गई थी। इस मामले में दो चश्मदीदों में से एक ने आरोपियों की पहचान करने की बात कही थी।
श्रीनगर में 1990 में हुए आतंकवादी हमले में वायु सेना (आईएएफ) के चार जवानों के शहीद होने के मामले में शनिवार को सुनवाई हुई। इसमें जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक समेत छह आरोपियों की चश्मदीद की तरफ से पहचान शनिवार को स्थानीय अदालत ने टाल दी।
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सीबीआई की मुख्य वकील मोनिका कोहली ने बताया कि कुछ आरोपितों के अदालत में मौजूद नहीं होने के कारण पहचान टाल दी गई थी। इस मामले में दो चश्मदीदों में से एक ने आरोपियों की पहचान करने की बात कही थी। आरोपी यासीन मलिक वीडियो कांफ्रेंसिंग से दिल्ली की तिहाड़ जेल से जुड़ा हुआ था।
अदालत में सुनवाई के दौरान दो चश्मदीद जिरह के लिए आए थे। उनमें से एक ने अभियुक्तों की पहचान करने की बात कोर्ट को बताई। कुछ आरोपियों के कोर्ट में मौजूद न होने पर पहचान को अगली सुनवाई तक के लिए टाल दिया गया।
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अन्य चश्मदीद से जिरह पूरी हो गई थी लेकिन उसने आरोपित की पहचान करने में असमर्थता जताई। विशेष टाडा अदालत पहले ही इस मामले में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख और कई अन्य लोगों के खिलाफ अलग-अलग आरोप तय कर चुकी है।
अन्य मामले जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद के अपहरण से जुड़े केस में मलिक और छह अन्य के खिलाफ पिछले साल 11 जनवरी को आरोप तय किए हैं।
केंद्र सरकार के जेकेएलएफ को प्रतिबंधित करने के बाद मलिक को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अप्रैल 2019 में टेरर फंडिंग मामले में गिरफ्तार किया था।