केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह।
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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 1987 में कश्मीर में विधानसभा चुनाव के दौरान हुई धांधली आतंकवाद के पनपने की वजह बनी। नई दिल्ली में वीरवार को एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि 1987 के चुनाव में जम्मू-कश्मीर में डॉ. फारूक अब्दुल्ला मुख्यमंत्री थे और राजीव गांधी प्रधानमंत्री। फारूक अब्दुल्ला दोबारा सत्ता में बहुमत के साथ लौटे। इसके लिए राज्य मशीनरी का दुरुपयोग मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट कोहराने के लिए हुआ। जितेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि राजीव गांधी और फारूक अब्दुल्ला में समझौते के चलते चुनाव धांधली पर केंद्र सरकार चुप रही।
चुनाव धांधली के खिलाफ आजादी के नारे सुनाई देने लगे और जम्मू-कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट जैसे आतंकवादी संगठन बन गए और कश्मीर घाटी में धमकी भरे पोस्टर चस्पाने का सिलसिला शुरू हो गया। 14 सितंबर 1989 को जाने माने कश्मीरी पंडित और भाजपा की कश्मीर इकाई के अध्यक्ष टीका लाल टपलू की हत्या कर दी गई। उस समय केंद्र में गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद थे।
मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबीया सईद का अपहरण हुआ और कुछ दुर्दांत आतंकवादियों को रिहा कर दिया गया। इससे आतंकवादियों के हौंसले बढ़ गए और कई राष्ट्रवादी हिंदुओं की हत्याएं की गईं। आतंकवादियों और अलगावादियों पर कोई शिकंजा नहीं कसा गया। केवल मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद इन पर शिकंजा कसने का कार्य शुरू हुआ। यासीन मलिक जोकि विंग कमांडर रवि खन्ना व अन्य कई हत्याओ का दोषी पाया गया था उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए गए।
महबूबा के आरोपों का दिया जवाब
महबूबा मुफ्ती के आरोप कि केंद्र सरकार ने उस वक्त कश्मीरी पंडितों के विस्थापन को रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, के सवाल के जवाब में सिंह ने कहा कि उस समय महबूबा मुफ्ती के पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद देश के गृह मंत्री थे।
उन्होंने तत्कालीन राज्यपाल जगमोहन का बचाव करते हुए कहा कि जो लोग आज कह रहे हैं कि जगमोहन कश्मीरी पंडितो के विस्थापन की वजह थे, उन्हे शायद इतिहास की जानकारी नहीं है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के आरोप कि भाजपा कश्मीर फाइल्स फिल्म का खुला समर्थन कर अपने सांप्रदायिक और विभाजनकारी एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम कर रही है, पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कश्मीरी पंडित विस्थापितों के पुनर्वास के लिए उस वक्त भी भाजपा नेता एलके आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी ने संघर्ष किया था।