सैनिकों के कौशल को बढ़ाने के लिए हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल(एचएडब्ल्यूएस) ने संस्थान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे अधिकारियों और सैनिकों को यूजी व पीजी और सर्टिफिकेट कोर्स प्रदान करने के लिए जम्मू विश्वविद्यालय के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है।
एमओयू माउंटेन क्राफ्ट, स्नो क्राफ्ट, रेस्क्यू ऑपरेशंस और डिजास्टर मैनेजमेंट में यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों के माध्यम से अकादमिक और तकनीकी विकास के लिए एचएडब्ल्यूएस और जम्मू विश्वविद्यालय के बीच शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग के आपसी इरादे को दर्शाता है।
कमांडेंट एचएडब्ल्यूएस मेजर जनरल राजीव कुमार सिंह ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन के उच्च स्तरीय अध्ययन और अनुशासन में तकनीकी उन्नति और सैन्य कर्मियों के विकास के लिए यह समझौता ज्ञापन ऐतिहासिक निर्णय है। यह जम्मू और कश्मीर के छात्रों को विशेष रूप से पहाड़ी, ऊंचाई वाले और बर्फीले क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन अध्ययन में कौशल को बढ़ाने में मदद करेगा।
इसमें एचएडबल्यूएस के पास उपलब्ध विशेषज्ञता होगी। सोनमर्ग में आयोजित समारोह के दौरान कुलपति प्रो. उमेश रॉय ने कहा कि एचएडब्ल्यूएस और जम्मू विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कार्यक्रम छात्रों को विशेष कौशल प्रदान करेगा। केंद्र शासित प्रदेश में साहसिक खेलों को बढ़ावा देने में मदद भी करेगा।
इस बीच, मेजर जनरल आरके सिंह ने कहा कि हवास गुलमर्ग 1948 में अपनी स्थापना के बाद से भारतीय सेना का महत्वपूर्ण संस्थान रहा है। स्कूल हर साल भारतीय सेना, अन्य सुरक्षा बलों और विदेशों के 1,400 से अधिक कर्मियों को प्रशिक्षित करता है। हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल में सैनिकों के प्रशिक्षण को दुनिया में सबसे कठिन माना जाता है।
द व्हाइट डेविल्स के रूप में जाने जाने वाले हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल में प्रशिक्षु न केवल कठिन स्थितियों में युद्ध का प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं, बल्कि ग्लेशियरों पर जीवित रहना भी सीखते हैं। प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में देश में कहीं भी हिमस्खलन और भूस्खलन के दौरान बचाव कार्यों के माध्यम से नागरिक अधिकारों की सहायता करने के कार्यक्रम भी शामिल हैं।
सैनिकों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। स्कूल कई भारतीय और विदेशी नागरिकों के जीवन को बचाने के लिए जाना जाता है। इसने कई पुरस्कार और वीरता पुरस्कार जीते हैं।