जम्मू विश्वविद्यालय के वीसी प्रोफेसर उमेश राय ने शुक्रवार को केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने छात्रों को विभिन्न स्टार्टअप और अन्य परियोजनाओं, छात्रवृत्ति और फेलोशिप में शामिल कर विज्ञान पाठ्यक्रम के एकीकरण की मांग की।
इस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि शिक्षाविदों की जिम्मेदारी सिर्फ डिग्री प्रदान करने की नहीं, बल्कि जीवनयापन को आसान बनाने की पहल के लिए होना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा सरकारी नौकरी ढूंढने के बजाय अपने लिए स्थायी स्टार्ट अप स्रोत खोजने में सक्षम होने चाहिए।
इसके अलावा पदभार संभालने के बाद वीसी की केंद्रीय राज्य मंत्री से यह पहली मुलाकात थी। उन्होंने डॉ. जितेंद्र सिंह से उनके मार्गदर्शन में शुरू की गईं विज्ञान परियोजनाओं में विश्वविद्यालय के छात्रों को शामिल करने का अनुरोध किया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि उन्हें खुशी है कि नए वीसी खुद एकीकृत दृष्टिकोण के प्रस्ताव के साथ सामने आए। केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय में अनुसंधान को स्टार्टअप के साथ जोड़ा जाना चाहिए। उद्योग को भी समान निवेश के साथ समान हितधारक बनाना अनिवार्य है।
मंत्री ने वीसी को बताया कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने विभिन्न कॉलेज और विवि के छात्रों के लिए एक मेंटरशिप कार्यक्रम शुरू किया है। इसमें एक शिक्षक संभावित शोधार्थी का प्रभार ले सकता है। फिर उसे आजीविका से जुड़ी स्थायी स्टार्टअप गतिविधि के लिए तैयार कर सकता है।
शिक्षा में तकनीकी हस्तक्षेप इस पीढ़ी के छात्रों के लिए एक वरदान है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने वीसी से शिक्षकों को छात्रों के साथ तालमेल रखने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर तेजी से उत्तर भारत के शिक्षा हब के रूप में उभर रहा है।
जम्मू के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भारतीय जनसंचार संस्थान, एम्स, भारतीय एकीकृत चिकित्सा संस्थान, भद्रवाह में राष्ट्रीय उच्च चिकित्सा संस्थान, कठुआ में औद्योगिक बॉयोटाक पार्क, केंद्रीय विश्वविद्यालय में उत्तर भारत का पहला अंतरिक्ष शोध विज्ञान केंद्र खोला गया है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के 2020 के तहत के विभिन्न पहलों पर चर्चा करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि इस नीति का उद्देश्य पिछली विसंगतियों को दूर करना है। पहले के बजाय समकालीन प्रावधानों को पेश करना है, जो वर्तमान में वैश्विक रुझानों को ध्यान में रखते हैं।