राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने अमेरिका में कश्मीर को लेकर दुष्प्रचार में शामिल रहे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के एजेंट गुलाम नबी शाह फई की करीब डेढ़ कनाल जमीन तत्काल कुर्क करने का आदेश दिया है।
एनआईए कोर्ट पहले ही फई को भगोड़ा घोषित कर चुकी है। फई की संपत्ति कुर्क करने के अदालत के इस आदेश को केवल कानूनी कार्रवाई नहीं बल्कि उस पूरे देशद्रोही तंत्र पर सीधा वार माना जा रहा है जो विदेश में बैठकर भारत को चुनौती देता रहा है।
बडगाम जिले के राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के विशेष न्यायाधीश याह्या फिरदौस ने मंगलवार को यह आदेश दिया। अदालत ने बडगाम के उपायुक्त (कलेक्टर) को राजस्व और पुलिस अधिकारियों की सहायता से संपत्ति पर तत्काल कब्जा लेने का आदेश दिया।
फई की वड़वान में एक कनाल दो मरला और गांव छत्ताबुग में 11 मरला जमीन है जिसे जब्त किया जाएगा। अदालत का यह फैसला सहायक लोक अभियोजक मोहम्मद इकबाल राथर की ओर से दाखिल एक आवेदन के बाद आया है।
अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि कुर्की अत्यावश्यक है क्योंकि जमीन फई के रिश्तेदारों के कब्जे में है और कानूनी प्रक्रिया विफल होने पर वे उसे बेच सकते हैं। विशेष न्यायाधीश याह्या फिरदौस ने अपने सात पृष्ठ के आदेश में कहा, यह अदालत रिकॉर्ड से संतुष्ट है कि आरोपी ने इरादतन खुद को छिपा रखा है।
भगोड़ा घोषित कर चुकी है अदालत
मूलरूप से बडगाम निवासी डॉ. फई के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत 2020 में मामला दर्ज किया गया था। 26 अप्रैल 2025 को अदालत उसे भगोड़ा घोषित कर चुकी है।
उसे प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी का समर्थक होने के साथ ही आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन का करीबी भी माना जाता है। उसने वाशिंगटन स्थित कश्मीरी अमेरिकन काउंसिल (केएसी) के निदेशक के रूप में पहचान बनाई। केएसी को लेकर उसका दावा था कि यह कश्मीर के लोगों पर तथाकथित अत्याचार को उजागर करने वाला एक स्वतंत्र और जमीनी स्तर का संगठन है।