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सुचेतगढ़ बॉर्डर देखने कम पहुंचे रहे पर्यटक, वाघा बनने का इंतजार

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आरएस पुरा। भारत-पाकिस्तान वाघा बॉर्डर की तर्ज पर जम्मू-कश्मीर के सुचेतगढ़ बॉर्डर (ऑक्ट्राय पोस्ट) पर भी बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी शुरू करने की कवायद चल रही है। इसके लिए विदेश, गृह और रक्षा मंत्रालय से भी चर्चा की जा रही है। इस योजना के परवान चढ़ने का इंतजार हो रहा है। वहीं, कोरोना महामारी शुरू होने के बाद से सुचेतगढ़ बॉर्डर पर सैलानियोें की संख्या सामान्य ढर्रे पर नहीं आ पाई है। जम्मू से 28 किलोमीटर दूर स्थित सुचेतगढ़ में इन दिनों काफी कम संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। लगभग दो वर्ष से यहां पर्यटकों में काफी कमी आई है।
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कोरोना के चलते दूसरे राज्यों से आने वाले पर्यटक नहीं आ पाना मुख्य कारण रहा। सर्दी में यहां काफी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। अगर आने वाले दिनों में कोरोना पर नियंत्रण बना रहा तो पर्यटकों के यहां पहुंचने की काफी संभावना है। सीमा दिखाने के लिए सीमा सुरक्षा बल द्वारा काफी बेहतर व्यवस्था की गई है। यहां पहुंचने वाले पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए उक्त स्थान का सौंदर्यीकरण भी किया गया है। भारतीय पोस्ट से 230 मीटर की दूरी पर पाकिस्तान की इनायत पोस्ट है। इन दोनों पोस्टों के मध्य जीरो लाइन तक दोनों देश के लोग अपने- अपने क्षेत्र से बार्डर देखते हैं। इन पोस्टों के आसपास यहां भारतीय किसान खेतीबाड़ी करते देखे जा सकते हैं वहीं पाकिस्तान के किसान भी नजर आते हैं।
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यूएनओ के अधिकारी करते हैं आवाजाही
ऑक्ट्राय पोस्ट से यूएनओ के अधिकारी आते जाते हैं और वाहन से उतर यूएनओ अधिकारी जीरो लाइन तक पैदल जाने के उपरांत जिस देश में आनाजाना हो वहां वाहन मुहैया कराया जाता है। इस मार्ग से दोनों देश के मध्य डाक का भी आदान प्रदान किया जाता है। कोई पाकिस्तानी नागरिक अगर भारतीय क्षेत्र में आ जाता है तो यहीं से भेजा जाता है। इस पोस्ट पर 131 फुट ऊंचा तिरंगा लगाया गया है, जिसे पाकिस्तान क्षेत्र में देखा जा सकता है।
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दोनों मुल्कों में फैली हैं सरहद
पर लगे पीपल के पेड़ की जड़ें
जीरो लाइन पर लगे पीपल के वृक्ष की आधी जड़ें भारत की जमीन में हैं तो आधी पाकिस्तान की मिट्टी में फैलकर अपना दायरा बढ़ा रही हैं। इस स्थान को पर्यटकों के लिए और भी आकर्षक बनाने की कोशिश जम्मू-कश्मीर का पर्यटन विभाग कर रहा है। सुचेतगढ़ ऐसा स्थान है जहां अंतरराष्ट्रीय क्रासिंग होने से फायरिंग नहीं होती और इसलिए यह पर्यटकों के लिए सुरक्षित भी है। इसे और भी आकर्षक और सुविधायुक्त बनाने के लिए यह पहल की जा रही है।
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पर्यटक स्थल पर प्राचीन रघुनाथ मंदिर भी
सीमा पर रघुनाथ मंदिर भी है। जिसे पर्यटन विभाग बेहतर बनाए जाने के साथ रात के समय पर्यटकों के रुकने के लिए व्यवस्था की गई है। मंदिर के सामने पीरबाबा की दरगाह भी है, जिन्हें देखने के लिए पर्यटकों में काफी है। यहां कैंटीन के साथ आसपास के लोगों द्वारा दुकानें खोली गई हैं।
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काफी समय ये यहां कम पर्यटक पहुंच रहे हैं, जिस कारण कारोबार मंदा चल रहा है। यहां पर्यटन विभाग की ओर से पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए काम किया गया है।
-रमेश लाल, दुकानदार
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इस स्थान से तीन किलोमीटर की दूरी पर घराना वेटलैंड है। यहां सर्दी के दिनों हजारों प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। सुचेतगढ़ से घरना गांव तक पक्की सड़क का निर्माण कराया गया है ताकि पर्यटक वेटलैंड आसानी से पहुंच सकें।
-सर्वण लाल भगत, पूर्व सरपंच, पंचायत सुचेतगढ़
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सरकारी रिकार्ड में भूमि होने पर इसका सीमा सुरक्षा बल की वाहिनी को सौंपे गए हैं ताकि इसे पर्यटक स्थल के तौर पर विकसित किया जा सके।
-रामलाल शर्मा, एसडीएम, आरएस पुरा
पर्यटन दिवस पर विशेष
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फोटो--- गंडोला सहित दो फोटो प्रदेश लॉगिन में
बेशक धीमी है रफ्तार, पर पर्यटन
स्थल रौनक से होने लगे गुलजार
- पटनीटॉप, नत्थाटॉप, सनासर के लिए संजीवनी बने ट्रैकिंग, मानसून फेस्टिवल के प्रयास
- संक्रमण से एहतियात के बीच नवंबर, दिसंबर, जनवरी तक होने लगी एडवांस बुकिंग
रोहित गुप्ता
चिनैनी। संक्रमण के ग्रहण के चलते पर्यटन स्थलों से लंबे अरसे से दूर रहे सैलानी लौटने लगे हैं। जम्मू संभाग के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पटनीटॉप, नत्थाटॉप और सनासर में रौनक गुलजार होने लगी है। यही नहीं, पर्यटक अब नवंबर से लेकर जनवरी 2022 तक एडवांस बुकिंग भी करवाने लगे हैं। वीरान पड़े पर्यटन स्थलों पर रौनक की इस वापसी के पीछे कोरोना संक्रमण से जुड़ी एहतियात और पर्यटन विभाग व प्रशासन की ओर से करवाए गए ट्रैकिंग व मानसून फेस्टिवल के प्रयास भी वजह साबित हो रहे हैं।
कारोबारियों के अनुसार सितंबर माह में जो काम पिछले वर्ष था, उसमें बढ़ोतरी हुई है। सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले दिनों में पटनीटॉप में बड़ी संख्या में सैलानी नजर आएंगे।
पीडीए व पर्यटन विभाग के संयुक्त अभियान के तहत जारी मानसून फेस्टिवल और उसके बाद ट्रैकिंग व बाद में अन्य कार्यक्रम से भी पटनीटॉप में सैलानियों का रुख हुआ है, जिससे कारोबारी खुश हैं। पटनीटॉप के होटल मैनेजर सुभाष चंद्र, राजेश ठाकुर ने कहा कि कारोबार 60 से 70 प्रतिशत हो जाता है, जबकि आम दिनों में भी 30 से 40 प्रतिशत पहुंच जाता है। सैलानी महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, दिल्ली व अन्य स्थानों से आ रहे हैं। इसमें श्री माता वैष्णो देवी दर्शनार्थी भी हैं। कई सैलानी फोन के जरिए पूछताछ कर रहे हैं, तो कुछ ने क्रिसमस, नववर्ष के अलावा नवंबर, दिसंबर व जनवरी के लिए भी एडवांस बुकिंग करवाई है। वहीं फोटोग्राफर यूनियन के प्रधान सुभाष चंद्र ने कहा कि सितंबर माह में जिस तरह का कारोबार हुआ है, उसकी उम्मीद कम थी। अब अच्छा कारोबार होने की आस जगी है। टैक्सी यूनियन के प्रधान प्रकाश चंद ने कहा कि सैलानियों की आवाजाही पटनीटॉप में जारी है। हर रोज कुछ कारोबार हो रहा है, जो अच्छा संकेत है। पर्यटन स्थल पटनीटॉप में आयोजित कार्यक्रम भी पटनीटॉप के कारोबार के लिए लाभदायक है।
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गंडोला से खूबसूरत चोटियां निहार रहे पर्यटक
पटनीटॉप से संगोत के लिए लगाए गए गंडोला से भी सैलानी पटनीटॉप में पहुंचकर वहां की खूबसूरती को निहार रहे हैं। करीब तीन किलोमीटर लंबे गंडोला की सैर कर सैलानी गदगद हो रहे हैं। पांच मीटर की ऊंचाई से शुरू हो रही सैर 60 मीटर पर खत्म होती है, जिसके बीच सैलानियों को देवदार के खूबसूरत वृक्ष देखने के अलावा जुगधार, शिवगढ़धार, सियोजधार, नत्थाटॉप की खूबसूरत चोटियां देखने का भी मौका मिलता है। रोपवे के सेल्स हैड मार्केटिंग अली जाफरी ने बताया कि हर रोज दो से 250 पर्यटक गंडोला प्वाइंट पर पहुंचकर गंडोला की सैर के अलावा, जिपलाइन, ट्यूवीन ड्राई, मैजिक कारपेट, रेस्टोरेंट का आनंद लेते हैं। कुछ दिनों बाद सैलानियों के ठहरने की व्यवस्था भी होगी।
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