राजोरी व बुद्धल इलाके में आईईडी लगाकर सुरक्षा बलों और आम जनता को निशाना बनाने वाले माड्यूल का भंडाफोड़ कर पुलिस ने लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े तीन आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आतंकवादियों को पाकिस्तान की ओर से निर्देश मिले थे कि वह सुरक्षा बलों के ठिकानों और अधिक भीड़भाड़ वाले इलाकों में आईईडी लगाकर अधिक से अधिक नुकसान करने का प्रयास करें।
इस बात का खुलासा राजोरी-पुंछ रेंज के डीआईजी डॉ. हसीब मुगल ने किया। डीआईजी ने बताया कि पहले बुद्धल के डंडोत में आईईडी लगाई गई और उसके बाद राजोरी के खेवरा में। पुलिस ने जब मामले की जांच की तो कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया और उनसे कड़ी पूछताछ करने के बाद पुलिस इन तीन आतंकवादियों तक पहुंच गई, जिन्होंने आईईडी लगाई थी।
पुलिस द्वारा पकड़े गए आतंकवादियों से की गई जांच के दौरान पाया गया कि आईईडी सीमा पार से आई थी और इससे जनता और सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाना था। पुलिस के लिए कानून व्यवस्था की स्थिति पैदा करनी थी। डीआईजी ने बताया कि पुलिस की जांच में सबसे पहले राजोरी टाउन खेवरा निवासी मजीद डार का नाम सामने आया।
जिसे हिरासत में लेकर पूछताछ की तो पता चला कि उसका एक और साथी मंजाकोट निवासी जुहैब खान भी मामले में शामिल था। जुहैब को गिरफ्तार कर कड़ी पूछताछ की तो पता चला कि यह दोनों मेंढर के बालाकोट निवासी मोहम्मद जबार के इशारे पर काम कर रहे थे।
इसके बाद जबार को भी गिरफ्तार किया गया। जबार से पूछताछ के दौरान सामने आया कि आईईडी एलओसी पार से आई थी और जबार ने जुहैब और मजीद को देकर राजोरी में प्लांट करने के निर्देश दिए थे। दोनों ने एक आईईडी को खेवरा में लगाया और दो को दस्सल में छिपा दिया।
डीआईजी के अनुसार जबार एलओसी फेंसिंग के आगे रहता है। उसका एक भाई इबरार भी आतंकवादी गतिविधियों में शामिल था और एक साल पहले मेंढर में पकड़ा गया था। जबार एलओसी के पार से अपने आकाओं के इशारे पर काम करता है। पकड़े गए तीनों आतंकियों से पूछताछ के दौरान यह सामने आया कि पाकिस्तान में बैठे आका राजोरी में खून खराब करने के मौके ढूंढते रहते हैं।
डीआईजी ने बताया कि इस मॉड्यूल को ध्वस्त करने के बाद राजोरी में बहुत बड़ा खून खराबा होने से रोक लिया गया है। डीआईजी ने बताया कि पकड़े गए तीनों आतंकवादी 10 दिन की रिमांड पर हैं। 10 दिन में पुलिस इनके कई और साथियों को भी गिरफ्त में लेगी और जहां इनके तार जुड़े हैं, वहां-वहां उनको धर दबोचेगी, ताकि भविष्य में कोई ऐसी घटना ने हो, जिससे सुरक्षा बलों या आम जनता को नुकसान उठाना पड़े।
आतंकियों के कुछ साथी पकड़े से बाहर
डीआईजी ने बताया कि पकड़े गए आतंकवादियों के कुछ साथी अभी भी बाहर हैं। ऐसा हो सकता है कि उनके पास भी कुछ विस्फोटक सामग्री हो और उसका प्रयोग करके वह और खून खराबा कर सकते हैं। इसलिए पुलिस इनके ऐसे सभी लिंक खंगालने में जुटी है। ताकि किसी तरह के भी नुकसान को होने से पहले टाला जा सके।
अधिक से अधिक नुकसान पहुंचाने की साजिश
डीआईजी ने बताया कि राजोरी में लगाई गई आईईडी के सर्किट्स बडे़ सोफिस्टिकेटेड तरीके से बनाए गए थे। इसमें 1000 के करीब बॉल बेयरिंग का प्रयोग किया गया था, ताकि अधिक से अधिक नुकसान पहुंचाया जा सके। डीआईजी ने बताया कि टिफ़िन आईईडी बनाई गई थी। इससे बहुत अधिक नुकसान करने के लिए इसमें टाइमर और प्रेशर दोनों का प्रयोग किया गया था।