जम्मू-कश्मीर रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (जेकेआरटीसी) के पास यात्री वाहनों की कमी आने वाले दिनों में आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बनेगी। प्रदेश के निजी बस चालक 24 फरवरी से हड़ताल पर जा रहे हैं। इससे स्कूल-कॉलेज के बच्चों के साथ आम लोगों की परेशानियां बढ़ेंगी। पहली बार ट्रांसपोर्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला लिया है।
27 फरवरी से जेकेएसएसबी की चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा शुरू हो रही है, वहीं जम्मू में सेना भर्ती भी जारी है। ऐसे में निजी बस चालकों की हड़ताल काफी परेशानी बढ़ाने वाली साबित होगी। जम्मू-कश्मीर रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन के पास 488 यात्री बसें हैं, जो निजी ट्रांसपोर्टरों के मुकाबले एक प्रतिशत भी नहीं हैं। ऐसे में अगर ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल लंबी खिंचती है तो आम लोगों पर इसका असर पड़ेगा। पिछले नौ वर्षों में जेकेआरटीसी के बेडे़ से 713 बसें कंडम हुई हैं।
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जम्मू शहर और आसपास के इलाकों में चलने वाली मेटाडोर की संख्या पांच हजार है। वहीं जम्मू संभाग में कामर्शियल वाहनों की संख्या 25 हजार है। जो 24 फरवरी से पूरी तरह ठप हो जाएंगे। जेकेआरटीसी के बेडे़ में मौजूद यात्री बसों में से बड़ी संख्या में बसें वर्कशॉप पर खड़ी हैं तो वहीं कुछ बसें जम्मू से श्रीनगर के लिए डाक लेने के काम में लगी हैं। ऐसे में आम लोगों के उपयोग के लिए कॉरपोरेशन के पास दौ सौ बसें ही हैं।
24 फरवरी को लखनपुर से उड़ी तक चक्का जाम रहेगा। ट्रांसपोर्टरों की मांगों की अनदेखी सरकार को महंगी पड़ेगी। लंबे समय से यात्री किराये में बढ़ोतरी नहीं हुई है, आज डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं। ट्रांसपोर्टर के लिए इन मुश्किल हालात में चलना मुश्किल हो गया है।
-विजय चिब, अध्यक्ष, मिनी बस यूनियन