जम्मू-कश्मीर में माह-ए-रमजान की शुरुआत को लेकर हुए भ्रम को हमेशा के लिए समाप्त करने के उद्देश्य से मुस्लिम धर्मगुरुओं ने मंगलवार को एक बैठक कर जम्मू-कश्मीर रुआत-ए-हिलाल कमेटी का गठन कर दिया। अब यह कमेटी चांद देखकर सर्वसम्मति से फैसले लेगी।
फिलहाल इस बैठक में शामिल धर्म गुरुओं के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि 17 अप्रैल को शब-ए-कद्र मनाई जाएगी और अगर ईद 20 अप्रैल को हुई तो जिन लोगों का रोजा शुरू में छूट गया था, उन्हें ईद के बाद कजा रोजा रखना होगा।
जम्मू-कश्मीर के ग्रैंड मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम, मुत्तहिदा मजलिस ए उलेमा (मीरवाइज गुट) और मजलिस शरे शिया याने शिया समुदाय के धर्म गुरुओं के एक समूह की मौजूदगी में श्रीनगर में हुई बैठक में कश्मीर घाटी में हाल ही में रमजान की शुरुआत में पैदा हुए मतभेद को दूर करने पर चर्चा की गई।
बैठक में शामिल मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि रुआत-ए-हिलाल कमेटी का गठन कर दिया गया है। भविष्य में जो भी फैसले होंगे वो सहमति के साथ लिए जाएंगे।
कमेटी में मीरवाइज मौलवी उमर फारूक, गुलाम रसूल हामी, मौलाना रहमतुल्ला कासिम के साथ प्रदेश के सभी बड़े उलेमाओं को शामिल किया गया है। मौसम विभाग से अपने प्रतिनिधि को भी इसमें शामिल करने की मांग रखी जाएगी। ब्यूरो
एक दिन देर से शुरू हुए थे रोजे
गौरतलब है कि कश्मीर घाटी के ग्रैंड मुफ्ती, मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम ने रमजान की शुरुआत के मौके पर कहा था कि चांद देखने की गवाही उन्होंने नहीं मिली है, जिसका मतलब बीते शुक्रवार से रमजान शुरू होना था।
पाकिस्तान की रुआत—ए-हिलाल कमेटी ने गत बुधवार देर शाम रमजान के चांद देखे जाने की घोषणा की जिसके बाद ग्रैंड मुफ्ती की सोशल मीडिया पर काफी आलोचना हुई थी। ग्रैंड मुफ्ती ने कहा, जो मतभेद थे उसके चलते दो ईदें आतीं। इससे कानून व्यवस्था की स्थिति का खतरा था। उसको देखते हुए हमने यह बैठक बुलाने का फैसला लिया था।