श्रीनगर। कश्मीर घाटी में हर धर्म के लोग एक साथ मिलकर हर त्यौहार को धार्मिक सद्भाव और भाईचारे के साथ मनाते हैं। इस त्यौहार का न केवल धार्मिक महत्व है बल्कि इसे कश्मीर में मुगल उद्यानों के उद्घाटन का भी प्रतीक माना जाता है।
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सचिव गुरमीत सिंह ने कहा, इस दिन का सिख धर्म में ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। इसी दिन श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने साल 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की थी।
उन्होंने कहा कि कश्मीर में बैसाखी का एक और महत्व है। बैसाख के महीने में मनाए जाने वाले इस पर्व के बाद ही असली मौसम-ए-बहार की शुरुआत यहां होती है। यह पर्व कश्मीर के लिए सामाजिक मेलजोल और भाईचारे का प्रतीक भी है। इस दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं और एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। कश्मीरी मुस्लिम समुदाय के लोग भी सिख भाइयों को शुभकामनाएं देते हैं और उन्हें भी इस त्यौहार का बेसब्री इंतज़ार रहता है। यह दिन श्रीनगर में मुगल उद्यानों के उद्घाटन का भी प्रतीक माना जाता है। शालीमार, निशात और अन्य उद्यानों को फ्लोरीकल्चर विभाग औपचारिक रूप से जनता के लिए खोल देता है। इस दिन इन उद्यानों में म्यूजिकल शोज का भी आयोजन होता है।
गुरमीत सिंह के अनुसार बैसाखी के अगले दिन 14 अप्रैल को गुरुद्वारा शाजिमर्ग पुलवामा, कलमपुरा सिंघपुरा बारामुला और मट्टन साहिब अनंतनाग में विशेष समागम आयोजित किये जा रहे हैं। इसके अलावा 20 अप्रैल को परंपिला उड़ी में भी बैसाखी मेले को लेकर समागाम का आयोजन किया जाएगा।