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रजनी बाला अमर रहे, पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारों से गूंजा नानक चक

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सांबा। जिले के नानक चक गांव की शिक्षिका रजनी बाला की अंतिम यात्रा के दौरान भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा। हजारों की तादाद में अंतिम विदाई देने पहुंचे लोगों ने रजनी बाला अमर रहे और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए। इन नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। तिरंगे में लिपटे शिक्षिका के पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई देने पहुंचे मंडलायुक्त रमेश कुमार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मुकेश सिंह, डीआईजी विवेक गुप्ता समेत अन्य वरिष्ठ अफसरों ने कंधा देकर सेल्यूट किया। अंत्येष्टि स्थल पर रजनी बाला को पति राजकुमार ने मुखाग्नि दी।
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इससे पूर्व तिरंगे में लिपटीं रजनी बाला के पार्थिव शरीर को राजकीय सम्मान की तर्ज पर अंत्येष्टि स्थल तक ले जाया गया। पुलिस और प्रशासन के आला अफसरों ने बारी-बारी कंधा दिया और अंत्येष्टि स्थल पर पहुंचकर सलामी दी। इस दौरान नारों के बीच हर किसी की आंखें नम हो गईं। गुस्साए लोग सरकार को कोसते भी रहे। लोगों का कहना था कि कश्मीर में हिंदुओं को सुरक्षा नहीं देने से आज ऐसे हालात सामने आए हैं। इस अवसर पर सांबा उपायुक्त अनुराधा गुप्ता, एसएसपी डॉ. अभिषेक महाजन, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना, सुरजीत सिंह सलाथिया, डीडीसी अध्यक्ष केशव खजूरिया, पूर्व मंत्री डॉ. दवेंद्र मन्याल के साथ डीडीसी सदस्य व विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी श्रद्धांजलि दी।
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बहू को पुकारते रहे रामपाल
बेटी सना भी लगाती रही गुहार
रजनी के ससुर रामपाल बार-बार रजनी को पुकार रहे थे। रजनी की 13 वर्षीय बेटी सना अत्री का रो-रोकर बुरा हाल था। वह बार-बार कह रही थी, मम्मी एक बार तो उठ कर देखो। कुछ महिलाएं सना को सहारा देकर उसे ढांढस बंधा रही थीं, लेकिन उसकी चीख ने सभी को रुला दिया। रजनी के पति राजकुमार नम आंखों से रजनी के शव को देख रहे थे। उसके छोटे भाई ने सहारा दिया। रजनी बाला के मायके वाले बेटी के शव को देख कर बिलख पड़े। शव के निकलते ही सारे गांव में सन्नाटा पसरा रहा। सभी अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे थे।
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