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Jammu News: चंडीगढ़ हत्याकांड के आरोपी शराबी का रिमांड खत्म, कठुआ जेल भेजा

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सांबा। चंडीगढ़ के एक मेडिकल स्टोर में कैशियर की हत्या के चर्चित मामले में गिरफ्तार सांबा निवासी अमित कुमार उर्फ शराबी को पुलिस रिमांड समाप्त होने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर जिला जेल कठुआ भेज दिया गया है। वहीं, मामले के मुख्य साजिशकर्ता बताए जा रहे मक्खन गैंग के सरगना मक्खन से पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां लगातार पूछताछ कर रही हैं।
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गौरतलब है कि 13 जून को चंडीगढ़ के एक मेडिकल स्टोर में तीन शूटरों ने अंधाधुंध फायरिंग कर कैशियर जानकी दास की हत्या कर दी थी। घटना के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई शुरू की। इनमें से दो शूटर पहले ही चंडीगढ़ पुलिस की गिरफ्त में आ चुके थे, जबकि तीसरा आरोपी अमित कुमार उर्फ शराबी, जो सांबा कस्बे का निवासी है को भी गिरफ्तार कर दो बार पुलिस रिमांड पर लिया गया था।
पुलिस रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जिला जेल कठुआ भेजने के आदेश दिए गए। उधर, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मक्खन गैंग के सरगना से पूछताछ कर मामले से जुड़े अन्य पहलुओं और संभावित नेटवर्क की जांच में जुटी हुई हैं।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपी 10 जून से ही चंडीगढ़ में मौजूद थे और उन्होंने कई बार सेक्टर-11 स्थित मेडिकल शॉप की रेकी की। शुरुआती तौर पर आरोपियों को 50 हजार रुपये दिए गए थे। रेकी पूरी होने के बाद उन्हें एक लाख रुपये और उपलब्ध कराए गए। इनसे उन्होंने कपड़े, जूते और अन्य सामान खरीदा तथा वारदात की अंतिम तैयारी की।
जांच में सामने आया है कि 13 जून को आरोपियों को तुर्की निर्मित जिगाना पिस्तौल समेत अन्य हथियार उपलब्ध कराए गए। इसके बाद उन्होंने जानकी दास को नजदीक से गोली मारकर हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी हथियारों को एक लिफाफे में डालकर सेक्टर-45 क्षेत्र में फेंक गए और उसका वीडियो बनाकर कथित तौर पर गैंग के संचालकों को भेज दिया।
पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि हत्या के बाद आरोपियों को मुंबई जाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन वे पहले दिल्ली पहुंचे और बाद में जम्मू-कश्मीर लौट आए। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक-एक कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
हालांकि हत्या में इस्तेमाल की गई एक पिस्तौल अब तक बरामद नहीं हो सकी है और उसकी तलाश जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन कहां से हो रहा था, फंडिंग का स्रोत क्या है और क्या इसके तार विदेशों में बैठे गैंग संचालकों से जुड़े हैं। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि सेक्टर-11 के मेडिकल कारोबारियों को निशाना बनाने के पीछे असली मकसद क्या था।
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