चादर, पिलो कवर, साड़ी, दुपट्टा और बैग सहित विभिन्न वस्त्रों पर ब्लॉक प्रिंटिंग का प्रशिक्षण
सांबा। जिले में हस्तशिल्प विभाग की ओर से संचालित कैलिको प्रिंटिंग प्रशिक्षण केंद्र महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की नई राह खोल रहा है। इस केंद्र में महिलाओं को चादर, पिलो कवर, साड़ी, दुपट्टा और बैग सहित विभिन्न वस्त्रों पर ब्लॉक प्रिंटिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के साथ-साथ प्रत्येक प्रशिक्षु महिला को हर महीने एक हजार रुपये का स्टाइपेंड भी प्रदान किया जा रहा है।
रख अबताल क्षेत्र की चरणजीत कौर ने बताया कि वह कैलिको प्रिंटिंग सीख रही हैं और भविष्य में इसी हुनर के सहारे आगे बढ़ना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि वह बॉर्डर एरिया की निवासी हैं जहां अकसर फायरिंग जैसी घटनाओं के कारण कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उनके क्षेत्र में खोला गया यह प्रशिक्षण केंद्र महिलाओं के लिए राहत साबित हो रहा है।
अमनदीप और सुमन लता ने बताया कि केंद्र खुलने से उन्हें न सिर्फ नया हुनर सीखने का मौका मिला है बल्कि हर महीने मिलने वाला स्टाइपेंड भी उनके लिए सहायक है। इस प्रशिक्षण से उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का भरोसा मिला है और वह भविष्य में इसी कार्य को आगे बढ़ाना चाहती हैं। उन्होंने सरकार और विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिला है।
इक्शु शर्मा, असिस्टेंट डायरेक्टर हैंडीक्राफ्ट्स सांबा ने जानकारी दी कि कैलिको प्रिंटिंग सांबा जिले की एक विरासत शिल्प है। विभाग की कोशिश है कि घरों में बैठी महिलाओं को सतत आजीविका से जोड़ा जाए। उन्होंने बताया कि जिले में दो प्रशिक्षण केंद्र पूर्ण रूप से संचालित हैं जहां प्रशिक्षक और संबंधित अधिकारी महिलाओं को ब्लॉक प्रिंटिंग का प्रशिक्षण दे रहे हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में लगभग 300 महिलाएं कैलिको प्रिंटिंग से जुड़ी आर्टिजन के रूप में पंजीकृत हैं। इसके अलावा तीन कारखानदार यूनिट चलाई जा रही हैं जिनके अंतर्गत 33 महिलाओं को स्टाइपेंड और मानदेय के साथ आजीविका से जोड़ा गया है। विभाग का लक्ष्य है कि हर वर्ष कम से कम एक कारखानदार यूनिट कैलिको प्रिंटिंग को समर्पित की जाए।
उन्होंने कहा प्रशिक्षण केंद्र महिलाओं के लिए पहला कदम साबित हो रहा है जहां वे हुनर सीखकर आगे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बढ़ रही हैं। विभाग का कहना है कि इन प्रयासों के माध्यम से सांबा की महिलाओं के सशक्तिकरण, गरिमा और सतत आजीविका को बढ़ावा देने का कार्य निरंतर जारी रहेगा।