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Jammu News: अरनिया के 40 किसानों की धान की फसल सूखने की कगार पर

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अरनिया। क्षेत्र के गांव ब्यासपुर परलाह में बिजली विभाग की मनमानी के चलते 40 किसानों की 250 कनाल धान की फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है। गांव में पिछले 5 दिन से ट्रांसफॉर्मर जला पड़ा है। इस पर 40 किसानों के मोटर पंप और 15 घरों को बिजली की आपूर्ति होती है।
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क्षेत्र में किसानों के पास सिंचाई का और कोई विकल्प मौजूद नहीं है। इसके चलते धान की फसल की चिंता किसानों को लगी हुई है। सीजन की शुरुआत में नहरें सुचारू हुई थीं, लेकिन पिछले एक महीने से नहर में पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। वहीं दूसरी ओर गांव में लिफ्ट इरीगेशन का एक बड़ा प्रोजेक्ट लगा है। इसे भी सिंचाई के लिए इस्तेमाल में नहीं लाया जा रहा है। इसके चलते किसानों के पास सिंचाई के लिए सिर्फ मोटर पंप का विकल्प मौजूद है। किसानों का साफ तौर पर कहना है कि बिजली विभाग के अधिकारी जानबूझकर किसानों को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 5000 रुपये प्रति कनाल खर्च करने के बाद धान की रोपाई की गई है। ऐसे में बिजली विभाग की मनमानी धान की फसल को बर्बाद कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले 5 दिन से लगातार बिजली अधिकारियों को ट्रांसफॉर्मर बदलने के लिए कहा जा रहा है, लेकिन वह किसानों के मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर धान की फसल सूख गई तो उसका हर्जाना बिजली विभाग से वसूल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार के किसानों को सशक्त और समृद्ध बनाने के दावे जमीन स्तर पर खोखले हैं। इसका जीता जागता सबूत आपके समक्ष है।

इस मुद्दे पर किसान और पूर्व पंच दर्शन कुंडल ने कहा कि किसानों का सारा दारोमदार मोटर पंप पर निर्भर है। बिजली विभाग की तानाशाही किसान को खुदकुशी करने पर मजबूर कर रही है। बैंक से कर्ज उठाकर धान की रोपाई की जाती है। जिसे चुकता करने में किसान को वर्षों लग जाते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की सुध कोई नहीं ले रहा है।
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इस मुद्दे पर पंचायत परलाह के पूर्व उप सरपंच राकेश सिंह ने कहा कि बिजली विभाग ट्रांसफॉर्मर पर कनेक्शन कम होने के चलते किसानों को प्रताड़ित कर रहा है। उन्होंने कहा कि कनेक्शन लेने के लिए बहुत सारी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ रही हैं। कनेक्शन लेने की प्रक्रिया को सुलभ करना चाहिए। वहीं दूसरी ओर किसानों की धान की फसल कनेक्शन न होने के चलते दांव पर लगाना सरासर गलत है। उन्होंने क्षेत्र के विधायक प्रोफेसर गारू राम भगत से मामले में कड़ा संज्ञान लेने के लिए कहा है।

कोट
ट्रांसफार्मर की क्षमता के हिसाब से ज्यादा मोटर पंप चलते हैं। इसके चलते ट्रांसफॉर्मर जल जाता है। लोगों को आपसी सहमति कर मोटर पंप को चलाना चाहिए, ताकि ट्रांसफार्मर पर अधिक लोड ना पड़े। किसानों के हितों का ध्यान रखना बिजली विभाग के लिए सर्वोपरि है। ट्रांसफॉर्मर को जल्दी बदल दिया जाएगा।
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-अशोक छिब्बर, एक्सईएन, बिजली विभाग
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