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Jammu News: राणा ने नेकां से की राजनीति कॅरिअर की शुरुआत

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जम्मू। अपने एजेंडे पर स्टैंड रखने के लिए माने जाने वाले देवेंद्र सिंह राणा ने नेशनल कान्फ्रेंस से अपने राजनीति कॅरिअर की शुरुआत की थी। वह 2002 से 2022 तक बीस साल नेकां में रहकर पार्टी के पूर्व अध्यक्ष व सांसद उमर अब्दुल्ला के काफी करीबी रहे। नेकां में कई अहम पदों पर जिम्मेदारी निभाने के साथ जनता के बीच अच्छी पैठ बनाने पर वह दो बार एमएलसी और एक बार विधायक रहे। इसके बाद भाजपा में भी शामिल होकर राणा नगरोटा से दूसरी बार जनाधार हासिल करके फिर विधायक बने।
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देवेंद्र सिंह राणा ने वर्ष 2002 में अपने कामकाज के साथ नेकां में शामिल होकर अपने राजनीति कॅरिअर की शुरुआत की थी। धीरे धीरे राजनीति में उनका अनुभव बढ़ता चला गया। तब उमर अब्दुल्ला ने उन्हें प्रेस सलाहकार की जिम्मेदारी दी, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। वर्ष 2008 में कांग्रेस और नेकां की गठबंधन सरकार में राणा को उमर के राजनीतिक सलाहकार की जिम्मेदारी दी गई। इसके साथ उन्हें एमएलसी भी बनाया गया। वर्ष 2013 में उन्हें जम्मू संभाग का प्रांतीय अध्यक्ष बनाया गया और वह 2002 तक इस पद पर रहकर खासतौर पर जम्मू संभाग के लिए आवाज बुलंद करते रहे। वर्ष 2014 में उन्होंने नगरोटा विधानसभा क्षेत्र से नेकां की ओर से टिकट पाकर जीत हासिल की। लेकिन वर्ष 2022 में वह भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा में भी अपने वरिष्ठ नेता के रूप में वह जम्मू संभाग के मुद्दों के समाधान के लिए आवाज उठाते रहे। उन्होंने कई अहम मामलों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चाहे वह नेकां में रहे या भाजपा में दोनों ही जगहों पर वह अपने एजेंडे पर स्टैंड रहे। वर्ष 2024 में भाजपा ने उन्हें नगरोटा से खड़ा किया, जिस पर राणा बेहतर जनाधार हासिल करते हुए दूसरी बार विधायक बने।
बताया जाता है कि पिछले कुछ समय से वह अस्वस्थ चल रहे थे। इससे पहले वर्ष 2019 में उन्हें कोविड की शिकायत हुई थी। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें दोबारा कोविड की शिकायत हुई, लेकिन वह ठीक रहे। उर्दू, पंजाबी, अंग्रेजी और डोगरी भाषा में माहिर राणा सभी वर्ग के लोगों के लिए काम करते थे।
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नेकां के प्रांतीय सचिव शेख बशीर अहमद का कहना है कि देवेंद्र राणा को जम्मू की आवाज कहा जाता था। चाहे वह नेकां में रहे या अब भाजपा में थे, वह खासतौर पर जम्मू संभाग के लोगों को सुनते थे। अलग दल में जाने के बावजूद वह अपने सभी पुराने राजनीतिक मित्रों से मिलनसार थे। उनके दरवाजे पर पहुंचकर कोई भी जरूरतमंद खाली नहीं लौटता था। उन्होंने राजनीति के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। हजारों लाखों लोग उनसे जुड़े हुए थे। उनके चले जाने से विशेषतौर पर जम्मू संभाग ने एक अहम राजनेता खो दिया है।
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