जम्मू। उच्च न्यायालय ने पूर्व मंत्रियों, पूर्व विधायकों को मिले बंगलों, ए टाइप सरकारी कोठियों से बेदखल करने की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नई अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश ताशी रबस्तान और न्यायमूर्ति एमए चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि इसमें दर्शाना होगा कि क्या 31 पूर्व मंत्रियों, पूर्व विधायकों ने सरकारी आवास छोड़ दिए या नहीं। 25 सितंबर की सुनवाई की आखिरी तारीख तक आवासों का विवरण देना होगा।
मुख्य न्यायाधीश ताशी रबस्तान की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने अधिवक्ता एसएस अहमद और अधिवक्ता सुप्रिया चौहान की दलीलें सुनने के बाद कहा कि 11 सितंबर की स्थिति रिपोर्ट के संबंध में नई अनुपालन रिपोर्ट सुनवाई की अगली तारीख तक या उससे पहले दायर की जानी चाहिए। सुनवाई की अगली तारीख पर आदेश पारित किए जाएंगे।
जब यह जनहित याचिका सुनवाई के लिए आई तो याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील एसएस अहमद ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद 31 पूर्व मंत्रियों, पूर्व विधायकों ने सरकारी आवास नहीं छोड़े हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शीर्ष अदालत के स्पष्ट निर्देशों को हवा में उड़ा दिया गया।
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11 सितंबर की स्थिति रिपोर्ट में 31 कब्जेधारकों के नाम
वहीं 11 सितंबर की स्थिति रिपोर्ट में 31 कब्जेदारों के नाम हैं। इनमें जाहिद हुसैन जान, अब्दुल माजिद पद्दार, जफर इकबाल मन्हास, निमामुद्दीन भट, फैयाज अहमद मीर (पूर्व सांसद), अब्दुल गनी वकील, हकीम मोहम्मद यासीन, मोहम्मद अब्बास वानी, अब्दुल रहीम राथर, बशीर अहमद डार, मोहम्मद अमीन भट, यासिर रेशी, एमवाई तारिगामी, सुरिंदर अंबरदार, सजाद गनी लोन, राजा मंजूर, सोफी यूसुफ, तारिक हुसैन कीन, कविंदर गुप्ता, सुनील शर्मा, जीएम सरूरी, दलीप सिंह परिहार, शेख इश्फाक जब्बार, सत शर्मा, आरएस पठानिया, दिवंगत राजेश गुप्ता का परिवार, मौलवी इमरान रजा अंसारी, विबोध गुप्ता, प्रदीप शर्मा और नीलम लंगेह शामिल हैं।