जम्मू। अनुच्छेद 370 हटने और कोरोना काल के दो साल बाद पुंछ में एतिहासिक बूढ़ा अमरनाथ यात्रा होने जा रही है। 29 जुलाई को यह यात्रा शुरू होगी, लेकिन इस बार की यात्रा 3 दशक बाद सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण होगी। जम्म, राजोरी और पुंछ जिलों से होकर यात्रा निकलेगी। आंकड़े कहते हैं कि इन तीनों ही जिलों में पिछले 2 साल से आतंकी साजिशों में भारी बढ़ोतरी हुई है। खासकर जम्मू और राजोरी में ड्रोन हमलों से लेकर स्टिकी बम और ग्रेनेड हमले हुए हैं। कई बार तो हाइवे पर आईईडी भी बरामद हुई है। ऐसे में यात्रा की सुरक्षा बड़ी चुनौती होगी, जिससे निपटने के लिए दोगुनी तैनाती करने की तैयारी चल रही है। सूत्रों के मुताबिक यात्रा शुरू होने में अभी 25 दिन बाकी हैं, लेकिन दो बार इसकी सुरक्षा की समीक्षा की जा चुकी है। अब भी सुरक्षा को लेकर लगातार मंथन चल रहा है।
हाइवे पर रहेगी अतिरिक्त तैनाती
सूत्रों का कहना है कि जम्मू से लेकर पुंछ जिले तक हाइवे और इसके आसपास के 2 किलोमीटर इलाके पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त रहेंगे। पुलिस, अर्द्धसैनिक बल और सेना की तैनाती रहेगी। जम्मू से लेकर पुंछ तक के हाइवे पर बहुत से ऐसे प्वाइंट चिह्नित किए गए हैं, जहां पर आतंकी किसी वारदात को अंजाम दे सकते हैं। लिहाजा इसके लिए कड़ा सुरक्षा घेरा रहेगा।
तीन जिलों में चुनौती
जम्मू जिला : पिछले दो साल में जम्मू जिले के अखनूर और कानाचक में दो बार पाकिस्तान ने आईईडी और स्टिकी बम गिराए। यात्रा के दौरान जम्मू से चौकीचौरा तक हाइवे पर आईईडी और स्टिकी बम से निपटना चुनौती होगी।
राजोरी जिला : पिछले दो साल में राजोरी के कोटरंका बुद्धल कालाकोट में आईईडी से तीन हमले किए गए। एक बार आतंकियों से मुठभेड़ हुई। राजोरी शहर में ग्रेनेड से दो बार हमले किए गए। हाइवे पर तीन से चार बार आईईडी बरामद की गई। ऐसे में यहां ग्रेनेड, स्टिकी बम और आईईडी से हमले की आशंका है, जो एक बड़ी चुनौती है।
पुंछ जिला : पुंछ जिले में एलओसी से आतंकियों की घुसपैठ रोकना एक बड़ी चुनौती होगा, क्योंकि बूढ़ा अमरनाथ यात्रा मंडी में है। यह इलाका एलओसी के नजदीक है। यहां घुसपैठ रोकना एक चुनौती है। हालांकि यहां भी आईईडी और स्टिकी बम का खतरा रहेगा।
कोट
यात्रा की दो बार सुरक्षा समीक्षा हो चुकी है। एडीजीपी जम्मू ने इसे लेकर बैठक की है। सुरक्षा के सभी जरूरी बंदोबस्त होंगे।
-हसीब मुगल, डीआईजी, राजोरी पुंछ