जम्मू। जम्मू-कश्मीर की पहली और 120 साल पुरानी मोहरा पन बिजली परियोजना में इंजीनियरिंग का अजूबा पुनर्जीवित होगा। जल्द ही यह परियोजना फिर से 11 किलोमीटर लंबी लकड़ी की नहर के पानी से बिजली तैयार करने लगेगी। 1992 से बंद पड़ी हेरिटेज परियोजना में इसी साल जून में पुनरुद्धार का कार्य शुरू होने जा रहा है।
परियोजना पहले चार मेगावाट क्षमता की थी, जिसे बढ़ाकर अब 10 मेगावाट किया जा रहा है। मोहरा पन बिजली परियोजना विरासती पन बिजली परियोजना की श्रेणी में होने की वजह से इसका ऐतिहासिक महत्व भी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार महाराजा के शासनकाल में कनाडा के इंजीनियरों ने लकड़ी की नालिका विधि इंजीनियरिंग की अद्भुत तकनीक से परियोजना को तैयार किया था।
1957 में आई बाढ़ में मोहरा पन बिजली परियोजना को भारी क्षति पहुंची। इसके बाद 1992 में आई बाढ़ में परियोजना पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। जम्मू कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक याकूब राजा फारूक का कहना है कि जून 2022 में मोहरा पन बिजली परियोजना की नए सिरे से आधारशिला रखी जाएगी। परियोजना को करीब तीन साल में पूरा किया जाएगा। मोहरा परियोजना को पर्यटन विकास से भी जोड़कर देखा जा रहा है।