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स्मृति शेष: पिता ने पंडित शिव कुमार को जम्मू में थमाया था संतूर

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जम्मू। तबले के तीन ताल बजाने वाली उंगलियाें ने संतूर थाम कर संगीत की नई दुनिया रच डाली। पंडित शिव कुमार शर्मा पहले तबला बजाते थे। जम्मू-कश्मीर के अंतिम महाराजा हरि सिंह के दरबार में राज गायक पिता उमा दत्त शर्मा कश्मीर से संतूर लेकर आए और जम्मू में बेटे शिव कुमार को यह वाद्ययंत्र थमाया। इसके बाद संतूर और शिव कुमार शर्मा एक दूसरे के पर्याय बन गए। सूफी संगीत और कश्मीरी लोक संगीत तक महदूद संतूर को पंडित शिव कुमार शर्मा ने शास्त्रीय संगीत से जोड़कर संगीत की नई विधा गढ़ी।
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जम्मू के मुबारक मंडी के रहने वाले पंडित शिव कुमार शर्मा को इस मुकाम तक पहुंचने के लिए लंबा संघर्ष भी करना पड़ा। पंडित शिव कुमार शर्मा के घराने से संबंध रखने वाले तबला वादक बिशन लाल वर्मा के पुत्र तबला वादक नीरज वर्मा इस संगीत के इस कामयाब सफर को बयान करते हैं। नीरज बताते हैं कि उनके पिता और पंडित शिवकुमार शर्मा एक साथ मुंबई गए थे। नीरज ने बताया कि पिता जी के साथ-साथ मैंने भी उनसे तबला बजाने की शिक्षा ली। पंडित शर्मा बचपन से तबला बजाते थे। एक दिन उनके पिता कश्मीर गए और वहां से संतूर ले आए। उन्होंने पंडित शर्मा को संतूर देकर इसका अभ्यास करने को कहा। इसके बाद संतूर और पंडित शिव कुमार शर्मा एक दूसरे के पर्याय हो गए। नीरज ने कहा - मुंबई जाने के बाद भी पंडित शर्मा को खासा संघर्ष करना पड़ा। वर्ष 1975-76 में विदेश में उनके कार्यक्रम हुए जिनसे उन्हें प्रसिद्धि मिलने लगी। जम्मू आने पर वे हमेशा मुझे तबला बजाने के बारे में बताते थे। उन्होंने अपने जीवन के कई किस्सों को साझा किया है।
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मुबारक मंडी में बीता बचपन
पंडित शिव कुुमार शर्मा का बचपन मुबारक मंडी की गलियों में बीता। संतूर सीखने के बाद पिता ने उन्हें और बेहतर अनुभव व मंच के लिए मुंबई भेजा। नीरज बताते हैं कि उन्होंने संतूर में कई बदलाव भी किए। संतूर में सौ तार होते थे, लेकिन उन्होंने बदलाव कर 80 तार ही रखे। परिवार में उनसे बड़ी एक बहन थीं। पंडित शिव कुमार के सुसराल जम्मू के गांधीनगर में है। उनके में दो बेटे रोहित शर्मा और राहुल शर्मा हैं।
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शहर के मुबारक मंडी में रहते उमा दत्त शर्मा के घर पंडित शिव कुमार शर्मा का जन्म 13 जनवरी 1938 में हुआ। पिता ने पांच वर्ष की आयु से उन्हें तबला और गायन शिक्षा देनी शुरू कर दी थी।
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सिनेमा जगत में भी अहम योगदान
पं. शिवकुमार शर्मा ने देश नहीं बल्कि दुनिया में संतूर को मशहूर किया। भारतीय शास्त्रीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में उनका बड़ा योगदान रहा है। पं. शिव कुमार ने बांसुरी वादक पंडित हरि प्रसाद चौरसिया के साथ मिलकर कई सुपरहिट गानों में संगीत दिया। इसमें चांदनी का मेरे हाथों में नौ-नौ चूड़ियां गाने समेत डर, लम्हे जैसी फिल्मों का कालजयी संगीत भी शामिल है।
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साहित्य जगत के लोगों में शोक की लहर
पं. शिवकुमार शर्मा के निधन पर प्रदेश में साहित्य जगत से जुड़े लोगों में शोक की लहर है। जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी के अतिरिक्त सचिव अरिवंद्र सिंह अमन ने कहा कि उनका जाना बड़ी क्षति है। उनके काम से मेरे जैसे हजारों लोग प्रेरित हुए। उनके साथ अकादमी ने कई कार्यक्रम भी आयोजित किए। संगीत में योगदान और उनके व्यक्तित्व की छाप कभी नहीं मिट सकती।
कोट
पंडित शिव कुमार शर्मा के निधन से भारतीय शास्त्रीय संगीत में एक खाली पन आ गया है, जिसे भरना मुश्किल होगा। पंडित जी संतूर के सबसे प्रसिद्ध प्रतिपादक थे, जिन्होंने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं।
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मनोज सिन्हा, उपराज्यपाल जम्मू-कश्मीर
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