जम्मू। जम्मू-कश्मीर की जड़ी बूटियों से बनने वाली आयुर्वेदिक दवाओं की देशभर में पहुंच बढ़ेगी। इन जड़ी बूटियों को भारत के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाकर दवाओं का उत्पादन किया जाएगा। इस दिशा में प्रदेश के किसानों को नया प्लेटफार्म देते हुए पहली बार तीन जड़ी बूटियों के लिए बंगलूरू और जम्मू के निजी औद्योगिक घरानों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसमें कुटकी, कुठ और शेताबरी जड़ी बूटियों से आयुर्वेदिक दवाओं का उत्पादन किया जाएगा। ये जड़ी बूटियां प्रदेश के उच्च पर्वतीय बर्फीले और गर्म इलाकों में पाई जाती हैं।
गुजरात में ग्लोबल आयुष वैश्विक सम्मेलन में बंगलूरू स्थित औद्योगिक घराने के साथ कुटकी जड़ी बूटी के लिए एमओयू किया गया है। यह कुपवाड़ा, भद्रवाह, किश्तवाड़ जैसे उच्च पर्वतीय क्षेत्र में पाई जाती है। इससे लिवर टॉनिक दवा बनाई जाती है। इसी तरह जम्मू के एक निजी औद्योगिक घराने के साथ कुठ और शेताबरी जड़ी बूटी के लिए एमओयू किया गया है। कुठ जड़ी बूटी भी प्रदेश के उच्च पर्वतीय बर्फीले क्षेत्रों में पाई जाती है और भद्रवाह के किसान इसकी आपूर्ति करेंगे। यह एंटिसेप्टिक दवा के तौर पर काम करती है। इसका जलन आदि में उपयोग किया जाता है। इसी तरह शेताबरी सुंदरबनी जैसे गर्म इलाके में पाई जाती है। नवजात के जन्म के बाद मां में दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए शेताबरी लाभदायक है। यह एक सामान्य टॉनिक भी है। प्रदेश से पहली बार इस तरह से किसानों को सीधे उद्योगपतियों से जोड़कर संवाद कराया गया है। इसका उद्देश्य बिचौलियों को बाहर करके किसानों को सीधा आर्थिक लाभ देना और प्रदेश के औषधीय पौधों को बढ़ावा देना है। इसमें बिचौलियों का कमीशन खत्म कर दिया जाएगा। जम्मू-कश्मीर में औषधीय पौधों को एक उद्योग के तौर पर विकसित किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर एक आयुष निवेश नीति पर काम कर रहा है, जिसमें देश विदेश के निवेशकों को आयुष चिकित्सा पद्धति के बढ़ावे के लिए आकर्षित किया जा रहा है। एमओयू के तहत जेएंडके मेडिसिनल प्लांट बोर्ड किसानों द्वारा उत्पादित जड़ी बूटियों के मूल्य तय करेगा और यह बाजार मूल्यों पर आधारित होगी।
प्रदेश का आयुष क्षेत्र उद्योग में विकसित होगा : निदेशक
आयुष विभाग जम्मू-कश्मीर के निदेशक डॉ. मोहन सिंह का कहना है कि पहली बार हुए ऐसे एमओयू से किसानों के लिए नया प्लेटफार्म खुला है। भविष्य में भी किसानों को सीधे उद्योगपतियों से जोड़ने की योजना है, जिससे जम्मू-कश्मीर में आयुष क्षेत्र को एक उद्योग के तौर पर विकसित किया जाएगा।