जम्मू। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव को लेकर उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायाधीश एमए चौधरी ने प्रतिवादी पक्ष को दो सप्ताह की अवधि के भीतर नामांकन प्रक्रिया को अंतिम रूप देने और अनुपालन रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। यदि ऐसा नहीं होता तो राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होंगे। बता दें कि 31 दिसंबर 2021 को उच्च न्यायालय ने आदेश जारी किया था कि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों के चुनाव कराए जाएं, लेकिन अभी तक चुनाव नहीं कराए गए।
सतिंदर सिंह ने उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की। कहा कि राजस्व सचिव ने अदालत के फैसले का पालन नहीं किया, जिसमें कि जल्द चुनाव कराने का आदेश दिया गया था। इस पर शुक्रवार को न्यायाधीश एमए चौधरी ने सुनवाई की।
तीन सीआरपीएफ कर्मियों की हत्या मामले में कांस्टेबल की उम्रकैद बरकरार
जम्मू। मुख्यमंत्री आवास पर तीन सीआरपीएफ कर्मियों की हत्या मामले में दोषी सीआरपीएफ कांस्टेबल की उम्रकैद की सजा बरकरार रहेगी। कांस्टेबल आनंद कुमार सिंह ने 3 अप्रैल 2006 को जम्मू में मुख्यमंत्री आवास पर एक सीआरपीएफ इंस्पेक्टर और दो हवलदारों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले की जांच पूरी होने के बाद अदालत में हुई सुनवाई में उम्रकैद की सजा सुनाई गई, जिसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। शुक्रवार को न्यायाधीश संजीव कुमार और एमए चौधरी की खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई की।
केस के मुताबिक पुरानी रंजिश के चलते कांस्टेबल आनंद ने इंस्पेक्टर मोहन श्याम की हत्या कर दी। जब दो कांस्टेबलों जोगिंदर झा और एचएन पांडे ने उसे पकड़ने का प्रयास किया तो आनंद ने उनकी भी हत्या कर दी। खंडपीठ ने कहा कि वर्तमान मामले में अभियोजन पक्ष ने तथ्यों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अपने मामले को साबित किया है। जांच में साफ है कि कांस्टेबल ने ही अपनी बटालियन के तीन जवानों की हत्या की है। निचली अदालत ने उसे सही दोषी ठहराया है और अपने तीन साथियों की हत्या करने के लिए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। निचली अदालत का फैसला सही है और यह बरकरार रहेगा।
सबूतों के अभाव में दुष्कर्म-हत्या का आरोपी बरी
जम्मू। नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या मामले के एक आरोपी को उच्च न्यायालय ने मौत की सजा से बरी कर दिया है। न्यायाधीश संजीव कुमार और एमए चौधरी की खंडपीठ ने शुक्रवार को इस मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की। आरोप है कि शंकर नाम के व्यक्ति ने 2010 में सतवारी क्षेत्र में एक सात साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म किया और इसके बाद उसकी हत्या कर दी। अदालत ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि यह वास्तव में 7/8 साल की नाबालिग लड़की की निर्मम हत्या का मामला है और वह भी शायद उसके साथ क्रूर बलात्कार के बाद, लेकिन ठोस और विश्वसनीय सबूत के अभाव में अपराध करने के आरोपी व्यक्ति को फांसी या आजीवन कारावास की सजा नहीं दी जा सकती। खासकर जब अपराध के लिए कोई चश्मदीद गवाह न हो और अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर टिका हो। लिहाजा आरोपी को दी गई मौत की सजा को खारिज किया जाता है। वह सभी आरोपों से मुक्त है।