जम्मू। जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अक्तूबर, 2018 में प्रदेश में कर्मचारियों के लिए सामूहिक स्वास्थ्य बीमा योजना को रद्द कर दिया था, जिसका अनुबंध अनिल अंबानी की रिलायंस को दिया गया था। इससे पहले सितंबर में जम्मू-कश्मीर सरकार ने यह कहते हुए आदेश जारी किया था कि पॉलिसी को मेसर्स रिलायंस जनरल हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के साथ 8,777 रुपये और 22,229 रुपये (कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए क्रमश:) के वार्षिक प्रीमियम पर दिया गया था। यह योजना सरकारी कर्मचारियों, स्वायत्त निकायों और विश्वविद्यालयों के लिए अनिवार्य थी। योजना पेंशनभोगियों, मान्यता प्राप्त पत्रकारों और अन्य श्रेणी के कर्मियों के लिए वैकल्पिक थी। बताते हैं कि इस योजना की कुल लागत 280 करोड़ रुपये थी, जिसमें से कंपनी को 60 करोड़ रुपये एडवांस भुगतान भी कर दिया गया।
योजना को जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में भी चुनौती दी गई थी। इसे लागू करने के तत्काल बाद राजनीतिक दलों व कर्मियों ने इसकी आलोचना की थी। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि राज्यपाल को अब मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक जांच का आदेश देने की आवश्यकता है, ताकि यह साबित किया जा सके कि बीमा अनुबंध के आवंटन के पीछे कौन था। इसमें शामिल धन की रकम इतनी बड़ी है कि यह सीधे-सीधे गलती नहीं थी। अनुबंध देने पर प्रारंभिक आलोचना के बाद रिलायंस जनरल इंश्योरेंस ने भी एक बयान जारी कर दावा किया था कि कंपनी ने कठोर और पारदर्शी प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के बाद अनुबंध हासिल किया।
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पावर प्रोजेक्ट का ठेका भी किया था निरस्त
किश्तवाड़ के एक हजार मेगावाट पक्कलडुल प्रोजेक्ट के दो टनल निर्माण से संबंधित ठेका भी सत्यपाल मलिक ने रद्द कर दिया था। इसके निर्माण पर लागत में 40 फीसदी का इजाफा हो जाने की वजह से ऐसा किया गया था। डोडा के लोअर कलानी में 48 मेगावाट के पावर प्रोजेक्ट का ठेका भी मलिक की अध्यक्षता में राज्य प्रशासनिक परिषद ने 2018 में रद्द कर दिया था। यह काम कोस्टल प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को सितंबर, 2013 में दिया गया था और सितंबर, 2017 तक पूरा किया जाना था।