जम्मू। केंद्रीय गृहमंत्री ने देश के सबसे बड़े अर्द्धसैनिक बल सीआरपीएफ को देश का सबसे अहम बल बताया। कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा हो या फिर अहम जगहों की कानून व्यवस्था, हर मोर्चे पर सीआरपीएफ ने अपना योगदान दिया है। अमरनाथ यात्रा, माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड, देश में चुनाव कराने में सीआरपीएफ का अतुल्य योगदान है। पहले देश की सरहद और बाद में आंतरिक सुरक्षा करते हुए सीआरपीएफ जवानों ने अपना बलिदान दिया है। सीआरपीएफ देश की रक्षा को सर्वोपरि मानने के विचार की परंपरा पर काम कर रही है। यह विचार देश को आगे ले जाएगा।
अमित शाह ने कहा कि सीआरपीएफ सिर्फ एक बल नहीं है, बल्कि लोगों का विश्वास है। देश का बच्चा-बच्चा बल के शौर्य को जानता है और विश्वास करता है। दंगा या कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति में सीआरपीएफ के आते ही लोगों को लगता है कि अब हालात सामान्य हो जाएंगे। यह विश्वास अनेक साल और कड़ी मेहनत से पैदा हुआ है। आतंकवाद, नक्सलवाद और उत्तर पूर्व के दंगों आदि में सीआरपीएफ ने शांति कायम की है। कुछ ही सालों में इन क्षेत्रों में हम शांति को पूरी तरह से कायम कर देंगे। पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सीआरपीएफ को निशान दिया था। यही कारण है कि आज सीआरपीएफ देश का सबसे बड़ा दल है। जिसके 3.25 लाख जवान हैं।
शाह ने 1959 को चीन के हमले में शहीद सीआरपीएफ जवानों को भी याद किया। साथ ही सीआरपीएफ के गठन से लेकर अब तक शहीद होने वाले 340 जवानों की श्रद्धांजलि दी। कहा कि सरकार इन शहीदों के परिवारों के विकास और ध्यान को हमेशा प्राथमिकता पर रखेगी। एमए स्टेडियम में सीआरपीएफ के 83वें स्थापना दिवस समारोह में गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि थे, जबकि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल, गृह सचिव अजय कुमार भल्ला, आईबी निदेशक अरविंद कुमार, डीजीपी दिलबाग सिंह, बीएसएफ के डीजी पंकज कुमार, सीआरपीएफ के डीजी कुलदीप सिंह और मेयर चंद्र मोहन गुप्ता आदि भी उपस्थित रहे।
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स्थापना दिवस पर दिखाए हैरतअंगेज करतब
सीआरपीएफ के स्थापना दिवस का शनिवार को समापन हो गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों, देशभक्ति के नृत्यों और महिलाओं के डेयरडेविल दस्ते ने बाइक पर हैरतअंगेज करतब दिखाए। मुख्य अतिथि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूरे स्टेडियम का दौरा किया। स्टेडियम में मौजूद हजारों लोगों की तरफ हाथ बढ़ाकर उनका अभिनंदन किया। शाह के एमए स्टेडियम पहुंचने पर तालियों की गूंज रही।
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शहीदों के आश्रितों को नियुक्ति पत्र सौंपे
जम्मू। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घाटी में अलग-अलग आतंकी घटनाओं में शहीद चार पुलिसकर्मियों के परिजनों को शुक्रवार को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर के सुरक्षाकर्मियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।
शाह शुक्रवार शाम को दो दिवसीय दौरे पर जम्मू पहुंचे और उन्होंने तस्वीर ट्वीट की, जिसमें वह राजभवन में शहीद पुलिसकर्मियों के परिजनों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी के लिए नियुक्ति पत्र सौंपते दिख रहे हैं।
शाह ने ट्वीट किया, ‘आतंकी घटनाओं में शहीद जम्मू-कश्मीर पुलिस के बहादुर जवानों के परिजनों को आज जम्मू पहुंचकर नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे। जम्मू-कश्मीर को सुरक्षित रखने के उनके समर्पण और वीरता पर पूरे देश को गर्व है। मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर के सभी पुलिसकर्मियों व उनके परिजनों के कल्याण के लिए कटिबद्ध है।’
राजभवन के प्रवक्ता ने बताया कि मंत्री ने शहीद जवानों के परिजनों से संवाद भी किया। उन्होंने बताया कि शाह ने पूजा देवी को जम्मू जिला पंचायत सचिव, इफरा याकूब को उद्योग और वाणिज्य विभाग में चौकीदार, आबिद बशीर और मोहसिन मुश्ताक को जम्मू-कश्मीर पुलिस में फॉलोवर के पद के लिए नियुक्ति पत्र दिया। मौके पर एलजी मनोज सिन्हा, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, डीजीपी दिलबाग सिंह भी थे।
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पूजा के पति कांस्टेबल रोहित कुमार 12 जनवरी, 2022 को कुलगाम जिले के सिंहपोरा-परिवान में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। इस अभियान में पाकिस्तानी आतंकी बाबर मारा गया था।
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इफरा हेड कांस्टेबल मोहम्मद याकूब शाह की बेटी हैं। याकूब शाह 13 अगस्त, 2014 को पुलवामा जिले के गालंदर-पांपोर इलाके में पुलिस वाहन को निशाना बनाकर किए गए हमले में शहीद हो गए थे, जबकि आबिद कांस्टेबल बशीर अहमद शेख के बेटे हैं। बशीर अहमद 29-30 जनवरी, 2000 की दरमियानी रात गांदरबल के राबीतार ब्रिज पर पुलिस पार्टी पर हुए हमले में शहीद हो गए थे।
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मोहसिन फॉलोवर मुश्ताक अहमद के बेटे हैं। मुश्ताक नौ मई, 1993 को बांदीपोरा जिले के कुनान में आतंकवादियों और बीएसएफ की गोलीबारी के दौरान शहीद हुए थे।