जम्मू। जम्मू संभाग में स्ट्राबेरी की खेती पर बारिश के बाद कोहरे का संकट मंडराने लगा है। जनवरी माह के आखिर में हुई बारिश से फसल को नुकसान हुआ है। पानी ठहरने के चलते नमी बढ़ने से लगभग तीस फीसदी फसल बर्बाद हुई है। अब इस माह फसल को पॉलीथिन टनल में ढक कर रखने की सलाह दी गई है। साथ ही टनल के दोनों ओर नालियों का निर्माण करने को कहा गया है। इसके अलावा वर्तमान में पड़ रहा कोहरा भी फसल को नुकसान पहुंचा रहा है। इसकी नमी से फसल प्रभावित हो रही है।
अगर अब फिर से बारिश होती है तो फसल बीस प्रतिशत तक और बर्बाद हो सकती है। मौजूदा समय में सांबा जिला के हरिपुर, जम्मू के आरएस पुरा, मढ़, उधमपुर, कठुआ और रियासी जिलों में स्ट्राबेरी की पैदावार बारिश के कारण प्रभावित हुई है। इन इलाकों में पानी जमीन में रुकने से पौधे अब सड़ने लगे हैं। पैदावार में काफी गिरावट आई है।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार ज्यादा नमी और कोहरा फसल को तबाह करता है। सबसे ज्यादा जनवरी माह में फसल बर्बाद होती है। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। जमीन पर पानी रुकने के कारण जम्मू, सांबा और कठुआ समेत अन्य जिलों में पैदावार प्रभावित रही है। 150 हेक्टेयर भूमि में स्ट्राबेरी की खेती है। इससे 1500 एमटी के करीब पैदावार होती है। 500 एमटी स्ट्राबेरी को बाहरी राज्यों में भेजा जाता है।
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60 से 80 रुपये किलो बिकती है
स्ट्राबेरी साठ से अस्सी रुपये प्रति किलो के हिसाब से बाजार में बिकती है। मार्च माह में बाजार में स्ट्राबेरी उपलब्ध हो जाती है। फरवरी माह के अंतिम सप्ताह में तूड़ान शुरू होता है। अक्तूबर माह में इसकी बिजाई की गई थी।
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दवाई का करें अब छिड़काव
पौधों के ज्यादा सड़ने पर अब स्कॉस्ट जम्मू ने बागवानों को दवाई का छिड़काव करने का सुझाव दिया है। सोफ और बायोस्टीन दवाई का छिड़काव किया जा सकता है। इससे जड़ें सड़ने से बचेंगी। पैदावार में गिरावट नहीं आएगी।
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विटामिन सी और ए होता है ज्यादा
स्ट्राबेरी में विटामिन और लवण मौजूद होते हैं। विटामिन सी और ए अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉलिक एसिड, फॉस्फोरस, पोटेशियम भरपूर मात्रा में होता है। बीमार लोग इसका सेवन ज्यादा करते हैं।
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कोट
स्ट्राबेरी की पैदावार बारिश के कारण प्रभावित हुई है। पानी जमीन में ठहरने के कारण पौधे सड़ने शुरू हो गए हैं। 1500 एमटी के करीब पैदावार होती है। बागवानों को छिड़काव करने की सलाह दी जा रही है।
- प्रशांत बख्शी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, फल विभाग, स्कॉस्ट
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